आशा भगोती की पूजा

Date: 14 Sep 2025 

             आशा भगोती का व्रत            

आस्योज बदी की अष्टमी से ” आशा भगोती ” की पूजा शुरू करो । एक पाटा पर आठ कुणा का गोबर माटी का चोका दो I फिर आँठू कुणा पर और बीच में आठ-आठ रोली, मेहँदी और काजल की टिक्की दो । फिर नौ जगह आठ गेहूँ का दाना, आठ दूब, आठ चिटकी, आठ पैसे, एक सुहाली बिना नमक की, एक फल चढ़ाओ और नौ जगह एक दिया जलाओ । आठ गेहूँ का दाना लेकर आशा भगोती की कहानी सुनो । कहानी नीचे लिखी है I

इस तरह आस्योज सुदी एकम तक पूजा करो । इस दिन ( एकम ) पूजा तो रोज की तरह ही करो, सिर्फ सुहाली नौ कुणा पर चार मीठी और चार बिना नमक की सुहाली का बाना निकालकर सासुजी को पैर छूकर कर दे दो । खाना में एक बार चार मीठी, चार बिना नमक की सुहाली और दूध फल खाओ । इस तरह आठ साल तक आशा भगोती का व्रत करो । नौवे साल में उजमन कर दो ।

आशा भागोती को उजमन

अगर उजमन करो तब अमावस्या तक तो उसी तरह पूजा करो । एकम के दिन पूजा कर के आठ सुहाग पिटारी तो ब्राह्मणियों को और एक सासुजी को चढ़ाओ । सुहाग पिटारी जैसी मंगला गौरी की करते हो उसी तरह करो, सिर्फ चार मीठी और चार बिना नमक की सुहाली और रखो । आठ सुहागन ब्राह्मणियों को जिमाओ । फिर एक-एक सुहाग पिटारी और दक्षिणा पैर छूकर दे दो । सासुजी की सुहाग पिटारी और रुपिया उनके पैर छूकर कर दे दो । व्रत हर साल की तरह ही करो ।

आशा भागोती की कहानी

एक हिमाचल राजा थो, वा क दो लड़कियाँ थी । एक को नाम गोरा, एक को नाम पार्वती थो । एक दिन राजा आपनी दोनूं लड़कियाँ न बुलाकर पुछ्यो कि क भाग को खाओ हो । पार्वती बोली कि म मेर भाग को खाऊँ हूँ और गोरा बोली कि म थार भाग को खाऊँ हूँ । राजा न ब्राह्मण बुला कर बोल्यो कि पार्वती तानी भिखारी और गोरा तानी राजा वर ढूंढीयो । ब्राह्मण गोरा तानी तो इसरजी न नारियल दे दियो और पार्वती तानी शिवजी बुड्डा भिखारी को भेष कर बैठ्या था, नारियल दे दियो । पिछ गोरा की बारात आई, तो खूब खातिर करी, धूम-धाम स ब्याह करयो, भोत सारो धन दियो । पार्वती की बारात आई तो कुछ भी कोणी खरचयो, सिर्फ कन्यादान दे दियो । शिवजी पार्वती न लेकर कैलाश पर्वत पर जान लाग्या । रास्ता म जठ भी पार्वतीजी पैर रख, बठ की ही दूब जल जाव । शिवजी पंडित न बुलाकर पुछ्यो कि यो के दोष है । जद बी बोल्या कि पार्वतीजी और इना की भाभियां आशा भगोती को व्रत करती, व तो आप क पीरां म जाकर व्रत उजम दियो, पार्वतीजी कोणी उजमी । ये भी आप क पीरां म जाकर उजमन करसी तो इना का दोष मिट जासी । शिवजी बोल्या की आपां पीरां चाल कर थारो उजमन करवा देवागां । खूब गाजा-बाजा स चालांगा, नहीं तो बिन न के बेरो पटगो की पार्वतीजी न इतनो सुख है । दोनूं जना खूब गहना-कपड़ा पहन कर चाल्या । आगे गया, तो एक रानी क बच्चो होन वालो थो । भोत भीड़ हो री थी । पार्वतीजी पूछ्या कि इतनी भीड़ कैयां हो री है । शिवजी बोल्या कि रानी क बच्चो होन वालो है, वा भोत दुःख पाव है, जिक स होरी है । पार्वतीजी बोल्या कि टाबर होन म इतनी तकलीफ होव, सो मेरी कूख बाँध देवो । शिवजी बोल्या कि मत बंधवा, नहीं तो भोत पछतावेगी । आगे न गया तो एक घोड़ी को बच्चो होण वालो थो । पार्वतीजी देख्या, तो ओंरू बोल्या कि टाबर होण म भोत तकलीफ होव, सो मेरी तो कूख बांधो । शिवजी भोत समझाया, पर पार्वतीजी हट पकड़ लियो । बोल्यो कि म तो कूख बंधा कर ही अठ स चालूँगी । शिव जी ऊना की कूख बाँध दी । बठी न गोरा आप क सासर म भोत दुःख पाती । शिवजी, पार्वतीजी खूब सज-धज कर पीरां पहुंचा । पीरां म माँ-बाप पहले तो उना न पहचाना ही कोणी, फेर देखकर खूब राजी होया । बाप पार्वतीजी न ओज्यूं पुछ्यो थे कि क भाग को खाओ हो । पार्वतीजी बोली म तो मेर ही भाग को खाऊँ हूँ, जद ही इतनो राज करूँ हूँ । पीरां म भाभियां आशा भगोती को व्रत उजम थी । ऊँना न देखकर पार्वतीजी बोल्या कि मेर भी उजमन की तैयारी हो जाव, तो म भी व्रत उजम देऊँ । भाभियां बोली कि थार के चीज की कमी है, शिवजी न बोलतां ही स तैयारी कर देगो । पार्वतीजी आपनी दासी न बुलाकर बोल्या कि शिवजी कुंवा की पाल पर बैठ्या है, ऊँना न जाकर कह दे कि पार्वतीजी आशा भगोती को उजमन करसी, सो तैयारी करनी है । दासी शिवजी न जाकर कह दी । शिवजी न सवा करोड़ को मुंदड़ो दिया और बोल्या कि ई स तैयारी कर लेसी । पार्वतीजी मुंदड़ा स भोत सारी तैयारी कर ली । आठ सुहाग पिटारी जिना म तीयल, गहना, पोली, नाथ, चुड़ा, रोली, मेहँदी, हिंगलू, मैंन, काजल, टिक्की, दर्पण, कंघी और सुहाली घाल कर बनायी । भाभियां देखी, तो बोली – आपां तो महिना स तैयारी करां हा, जद भी इतनी तैयारी कोणी होई, ये तो जरा सी देर म सब कर ली । सब कोई खूब ठाट-बाट स उजमन करया । शिवजी, पार्वतीजी न कहायो कि अब आपां चाला, जद ससुरोजी शिवजी न जिमन बुलाया । शिवजी खूब गहना-कपड़ा पहन कर, छोटो सो रूप धर कर, गाजा बाजा स जिमन गया । ससुरोजी भोत सारी रसोई बनवाई । शिवजी न देखकर सारी दुनिया बोली – भिखारी देख कर दियो थो, पर पार्वतीजी तो आप क भाग स राज कर है । शिवजी जीमण लाग्या तो सारी रसोई खतम कर दी । पार्वतीजी क लिए कुछ भी कोणी छोड्यो । साग को उबाले ड़ो पीन्दियो पड्यो थो बिन ही खाकर पानी पीकर बैठ स पाछा चाल्या । रास्ता म धुप पड़ थी, सो गाछ क बीच बैठगा । शिवजी, पार्वतीजी न पूछ्या कि थे के खाकर आया । पार्वतीजी बोल्या – थे खाया सो ही म खायी । थोड़ी देर म पार्वतीजी गाछ क बीच सोगा । शिवजी ऊँनाकी पेट की ढकनी उतार कर देख तो, साग को पीन्दियो और पानी पड्यो है । पार्वतीजी उठ्या तो शिवजी औरू पूछ्या कि थे के खाकर आया । बी बोल्या – थे खाया सो ही म खाई । शिवजी न हांसी आगी I बोल्या – थे तो साग पानी पी कर आया हो, म थारी पेट की ढकनी उतार कर देखी थी । पार्वतीजी बोल्या – महाराज थे मेरा तो पर्दा पास कर दिया लेकिन आग न कोई का मत करियो । म्हे सासर की बात पीहर म, पीहर की बात सासर म राखां हां । आग न चाल्या तो, रास्ता म दूब सूख गी थी जिनकी पाछी हरी होगी । शिवजी सोच्या कि दोष तो मिटगो और आग न गया तो वाई घोड़ी क पास बच्चो खेल थो । शिवजी बोल्या कि यो वाई घोड़ी को बच्चो है, जिकी दुःख पाव थी । जठ थे कूख बंधाई थी । पार्वतीजी बोल्या – महाराज मेरी तो कूख खोलो । शिवजी बोल्या कि अब कैयां खुलसी, म तो था न पहले ही मन करयो थो । और आगे गया तो वाई रानी जलवा पूजन जाव थी । पार्वतीजी पूछया कि यो के होव है । शिवजी बोल्या – या वाई रानी है जिकी दुःख पाव थी । इक लड़को होयो है सो जलवा पूजन जाव है । ऊँ न देखकर पार्वतीजी बोल्या – मेरी तो कूख खोलो । एक दम हट कर लियो, जद शिवजी जादुक बटुव म स मैलका गणेशजी बनाकर पार्वतीजी न दिया । सारा नेग करवाया, जलवा पूजवाई । पिछ पार्वतीजी सारी नगरी म हेलो फिर्वायो कि म सुहाग बाटूंगी । जितकी छोटी दुनिया थरी जिको तो भाज-भाज क भोत सो सुहाग लेगी । ब्राह्मण-बनियाणी श्रृंगार करन लाग गी, तो देरी होन स सारो सुहाग बंटगो । वे आई तो शिवजी बोल्या कि इना न तो सुहाग देनो पड़सी । जद पार्वतीजी नुवां म स मेहँदी, माँग म स हिंगलू टीका म स रोली, कोय म स काजल काड्यो और चिटली आंगली को छांटो दियो । सारी नगरी पार्वतीजी की जय-जय कार करन लाग गी । हे पार्वतीजी ! जिसो सब न सुहाग दियो, बिसो म्हान भी दियो । कहतां न, सुणतां न, हुंकारा भरतां न, आपना सारा परिवार न देईयो ।