
मंगला गौरी का व्रत
Date: 27 Jul, 3 Aug, 10 Aug, 17 Aug
श्रावण के सब मंगलवार को ” मंगलागौरी का व्रत ” करो । 16 मंगलवार व्रत करते हैं और कुछ लोग 20 भी करते हैं I इस दिन मंगलागौरी की पूजा करो । सिर नहा के पूजा करने बैठो । पहले एक पाटा पर आधी दूर में सफेद और आधी दूर में लाल कपड़ा बिछाओ । पाटे पर थोड़ा सा चावल रखो, एक सुपारी पर मोली लपेट कर गणेशजी बना कर रखो । सफेद कपड़ा पर चावल की नौ कुड्डी कर के नौग्रह बनाओ । पाटा के नीचे थोड़ा सा गेहूँ पर कलश रखो । एक आटा का चौमुखी दीया, नाल की सोलह-सोलह तार की चार बत्ती लगा कर चासो । सोलह धुप बत्ती चासो । अब सबसे पहले गणेशजी की जल, पंचामृत, मोली, रोली, चन्दन, जनेऊ, सिन्दूर, चावल, फूल, दूब, बेलपत्र, प्रसाद, फल, लौंग, इलायची, पंचमेवा, पान सुपारी, अबीर, गुलाल से पूजा कर के दक्षिणा चढ़ाओ । फिर कलश की पूजा पूजा करो । पूजा के समय कलश में जल, एक सुपारी, पंचरत्न, छाड़ छड़लो, थोड़ी सी माटी और दक्षिणा डालो । पांच आम का पत्ता लगाओ । एक सिकोरा में थोड़ा सा चावल डालकर कलश पर रखो । उसके बाद जैसी गणेशजी की पूजा की है वैसी ही कलश की और नौग्रह की पूजा करो । सिन्दूर और बेलपत्र नहीं चढ़ाओ । बाद में षोडश मातृका की भी बिना जनेऊ के सब सामग्री और हल्दी, मेहँदी, और सिन्दूर से पूजा करो । फिर थोड़ी सी मोली गणेशजी को चढ़ाओ । ये चढ़ाई हुई मोली सब देवी-देवता को चढ़ाओ । पंडित के टीका काढ़ कर मोली बाँधो । अब मंगलागौरी की पूजा करो । एक पाटा पर माटी का खोमचा रख कर बीच में एक चकला रथ रखो । चकला के बगल में आटा का सिल-लोड़ा बना कर रखो और चकला पर गंगाजी की माटी से मंगलागौरी बना कर रखो । सबसे पहले मंगलागौरी को जल, दूध, दही, घी, शहद, चीनी और पंचामृत से नहलाओ । फिर कपड़ा और नथ पहनाओ । रोली, चन्दन, सिन्दूर, हल्दी, चावल, मेहँदी, काजल लगाओ । सोलह तरह का सोलह-सोलह फूल, सोलह तरह का सोलह-सोलह पत्ता, सोलह माला, सोलह आटा का लाडू, सोलह फल, पांच तरह का सोलह-सोलह मेवा, सोलह तरह का सोलह-सोलह अनाज, सोलह जीरा, सोलह धनिया, सोलह पान, सोलह सुपारी, सोलह इलायची, सोलह लौंग चढ़ाओ और एक सुहाग पिटारी चढ़ाओ । उसमे एक साड़ी, रोली, मेहँदी, काजल, हिंगलू, सिन्दूर, कंघा, दर्पण, नाल, तेरह चूड़ी, मैण, रुपिया और जो आपकी इच्छा हो वो रखो । फिर कथा सुनो । कथा सुनने के बाद आटा का सोलह दीया बना कर उसमे सोलह तार की सोलह बाती डाल कर कपूर के साथ आरती करो I परिक्रमा दो । फिर सोलह आटा के लाडू पर बाना निकाल कर सासुजी को लाडू पैर छूकर कर दे दो । बाद में अनाज में सिर्फ गेहूँ से बना हुआ, बिना नमक का भोजन करो । दूसरे दिन सुबह मंगलागौरी का विसर्जन करने के बाद खाओ ।
मंगलागौरी का उजमन
मंगलागौरी का उजमन सोलह या बीस मंगलवार का व्रत करने के बाद करते हैं । इस दिन कुछ नही खाते हैं । मेहँदी लगवाकर, शाम को सिर नहा कर, गठजोड़ा से पूजा करने बैठो । पूजा चार ब्राह्मण से कराते हैं । एक चौकी के चारो पैर में केला का थम्भ बाँध कर ऊपर से ओढ़नी उढाओ । इस मंडप में एक कलश पर एक कटोरी में सोने की मंगला गौरी बैठा कर रखो । और सारी पूजा जैसे हर मंगलवार को करते हो, वैसे ही कर लो पर आटा के सिल लोढ़ा के बदले चाँदी की सिल और सोना का लोढ़ा बनाओ । तीन टिकड़ी सोने की कलश में डालो । पूजा के समय जाप का गीत गाओ । चार पीतल के टोपिए में चावल और रुपिया डाल कर ब्राह्मण को दे दो I फिर हवन करो, कथा सुनो, आरती करो । आरती चांदी का सोलह दीया बनाकर, उसमे नाल की सोलह तार की और एक-एक सोने के तार की सोलह बाती बनाकर डालो । फिर आटा का सोलह लाडू पर एक साड़ी और रुपिया रख कर, बाना निकाल कर सासुजी को पैर छूकर दे दो । जिस पंडित से पूजा कराए हो उन्हें भोजन कराकर धोती, गमछा, माला और लोटा दो । दूसरे दिन सुबह सब देवी देवता की और मंगलागौरी की पूजा करो । पूजा करने के बाद जब आरती करो तब दाई छात करे, उसमें रुपिया डालो । सोने की टिकड़ी डालकर छायापात्र दो । और सोलह सुहाग पिटारी का संकल्प लो । सुहाग पिटारी में एक ओढ्ना, एक साड़ी, दो साड़ी, एक नाथ, पायल, दर्पण, कंघा, मैण, हिंगूल, सिन्दूर, रोली, मेहँदी, काजल, चूड़ा, नाल और आरती के लिए चांदी का दीया, सोने की बाती डालो और जो आपका मन हो वो डालो । एक पिटारी और बनाओ जिसे सासुजी पैर छूकर दे दो । सासुजी की पिटारी में भी इतना ही समान डाल कर कपड़ा और गहना डालो । दीया और बाती नहीं डालो । और सब कोई को रुपिया पैर छूकर दे दो । सोलह जोड़ा जोड़ी को भोजन कराओ । भोजन कराकर ब्राह्मनियों को तो सबको एक-एक सुहाग पिटारी दे दो और ब्राह्मणों को दक्षिणा दो, अगर मन हो तो धोती, गमछा और लोटा दो I सबको भोजन कराकर खुद भी भोजन कर लो। सबमे प्रसाद बांटो I