परोजन
१) एडल सदल नीसरिये मांय, अट सट गटाए पलात मेरी मांय I
सेडल आई शहर म एमांय थे, हर कांपी म्हारा बाल कियांरी मांय I
थे मत डरपो म्हारा बाल कियांरी मांय I कुशल करगी म्हारी सेडल मांय I
धोकन ए म्हारा दशरथजी की नार, तन एनीवाज म्हारी सेडल मांय I
ठंडी रोटी राबड़ी ए मांय, यो माता को भोग मेरी मांय I
सील सील धोकस्यां ए मांय, पिछ ए पड़गी धुप मेरी मांय I
माता को मंड सांकड़ो ए मांय, जाती ढारो बड़ो परिवार मेरी मांय I
और चिणाऊँ मंड मोकलो ए मांय, दशरथजी को परिवार मेरी मांय I
२) माता उदोए बीडो कर नीसरी, माता उदोए हुवो परभात I
म्हे सेडल थारा जातीड़ा I
माता उदो दशरथजी को कोटडयां, जाक रामचन्द्र सरीसा पूत I
म्हे सेडल थारा जातीड़ा I
म्हार लव – कुश न टूंठी पचफूली, म्हार रामचन्द्रजी न जतन कराय I
माता म्हे सेडल थारा जातीड़ा I
हनुमानजी का गीत
माँ अंजनी के लाल, सुनले ना मेरी पुकार I(२)
हो जाय भव से पार हम पे कृपा जो तेरी हो I माँ अंजनी……
दरबार तेरा पावन, लगती है शोभा प्यारी I
महिमा तेरी है निराली, जाने दुनिया सारी I
तेरी भक्ति तेरी शक्ति से, मिट जाते सब जंजाल I माँ अंजनी……
तेरी कितनी करूँ बड़ाई, रामचन्द्र के बने सहाई I
लाके संजीवन बूटी, लक्ष्मण की जां बचाई I
भीड़ पड़े जब भक्तों पे तब, तू संकट देता सब टाल I (२) माँ अंजनी……
ओ सालासर के राजा, सारो सबके काजा I
शरण में पड़ा हूँ तेरी, मेरी बिगड़ी बना जा I
बिनती सुनले “खेदड़” की, दुखों से गया हूँ हार I माँ अंजनी……
भैरूं जी का गीत
इन सरवरियाँ री ऊँची नीची पाल, नीर भर झीलती परिहार I
हरदेव म्हारा लाडलो ओ भैरू, हारां र कारण म्हारो सुसरोजी रुसायो I
तो सुसरोजी रुसाया, सासू देछ म्हार गाल I हारां र…….
हारां र कारण म्हारो जेठजी रुसाया, तो जेठजी रुसाया जिठानी बोल म्हा न बोल I हारां र…….
हारां र कारण म्हारो देवरियो रुसायो, देवरियो रुसायो, दोरानी दोड़ी पीहर जाय I हारां र…….
हारां र कारण म्हारा बाईजी रुसाया, बाईजी रुसाया, वा तो संसार ना जाय I हारां र…….
हारां र कारण म्हारा मारूजी रुसाया, मारूजी रुसाया, म्हा पर ल्याव लोहड़ी सोक I हारां र…….
मूंगफली चोलाफली कालूड़ा, दिन दस बाबा लावणी कराय, डूयणी कराय I हारां र…….
कासियो बगायो बालू रेत म कालूड़ा, तो बैठियो बाबा आसन डाल, गोढ़िये मरोड़ I हारां र…….
धाई ए कुमाई थारी लावणी कालूड़ा, तू तो तेरी बाबा जटाए समेट, लटाए समेट I हारां र…….
मरे जाण थो तन ए ठगूंगा, भलो ए ठगो दशरथ घर नार, रामचन्द्र की ए माथ I हारां र…….
बधावा
बाग लगायियो पन्ना मारू बाग़ लगाया, माली डारो तोरो थारी धण स सयो ए न जाय I
सयो ए न जाय पन्ना मारू रहो ए न जाय, उजली बतीसी प्यारी रो जोबन झोला खाय I
महल चिनाईयो पन्ना मारू महल चिणाय, चेजारां रो तोरो थारी धणस सयो ए ना जाय I सयो…….
भात रंधाइयो पन्ना मारू भात रंधाय, रसोयां रो तोरी थारी धण स सयो ए ना जाय I सयो…….
हार घड़ाईयो पन्ना मारू घड़ाय, सोनीड़ारो तोरो थारी घणस सयो ए ना जाय I सयो…….
सेज बिछाइयो पन्ना मारू सेज बिछाय, दासी बांदी रो तोरो थारी धण स सयो ए ना जाय I सयो…….
कद की खड़ी ओ पन्ना मारू कद की खड़ी, घूंघटिया म जाला दे छ थारी जीव की झड़ी I सयो…….