माता की खिचड़ी
शादी के पहले जिस दिन बान होता है, उस दिन माता की खिचड़ी की जाती है I
खिचड़ी के लिए मूंग दाल और चावल की ज़रुरत होती है। एक बर्तन में कच्चा चावल और कच्ची मूंग की दाल मिलाकर रखते हैं I दोनों मिलाकर भार सवा किलो (1.25 kg) या फिर 5 किलो या फिर 7 किलो या फिर 11 किलो का होना चाहिए । जिसके घर में जितने किलो की खिचड़ी करने का रिवाज होता है, वह उतने किलो की खिचड़ी लेता है । अब अगर किसी को अपने घर के रिवाज की जानकारी नहीं है तो वह सवा किलो की खिचड़ी ले लेता है।
अब जिसकी शादी है, वो और उसकी मां बान वाले दिन सुबह नहाने के बाद बिना कुछ खाए पिए भगवान के सामने बैठकर खिचड़ी को रोली चावल से चिरचते हैं। फिर बान की रसोई (भोजन) के साथ खिचड़ी भी बना दी जाती है I अपने घर के खपत के अनुसार चाहे पूरे दाल चावल की या फिर उसमे से थोड़े से दाल चावल लेकर खिचड़ी बना लेते हैं।
खिचड़ी बनाने के बाद उसका छूता निकाला जाता है। छूता निकालने के लिए 1 प्लेट में 4 जगह थोड़ी-थोड़ी खिचड़ी रखकर, उसके ऊपर घी और रूपए रखकर, 7 बार अपना हाथ फेरकर, ब्राह्मणी को दे देते हैं। बाकी चिरचे हुए कच्चे दाल चावल में से बचे हुए दाल चावल भी ब्राह्मणी को दे देते हैं।
चिरचने के बाद बान होता है।
पीतरों का धोक
हर अमावस को पैंडा में पितरों की धोक देते हैं I जगह धोकर रोली से साथिया बनाओ I जल, चावल, फूल, जलेबी और दक्षिणा चढ़ाओ I टीका लगाकर धोक लो I ब्राह्मण – ब्राह्मणियों को खाना खिलाओ और उन्हें टीका लगाकर कर दक्षिणा दो I
राती जुगा
दीवाल को पानी से धोकर, घर का कोई आदमी हाथ में घी लगाकर थापा लगाता है I उसके सामने एक मट्टी की झावली में मूंग – पैसे डालकर उसमे एक कांसी या चांदी की कटोरी में घी, पैसे और नौकर से नाल की बाती बनवा कर रखो I नौकर से ही दीया जलवाकर गुड़ – पैसे दो I फिर दीया की जल, रोली, चावल से पूजा करो I मूंग – चावल से देवी – देवतां का नाम लेकर सात बार आखां डालो I टीका लगाकर सब देवी – देवता का गीत गाओ I गीत गाने के बाद दीया पर चालनी ढक दो I मेहँदी लगाओ I और गीत गाया जाय तो गा लो I
परसोत्तम महीना
जिस साल दो महीने एक जैसे आते हैं तो उसके पहले महीने की सुदी और दूसरे महीने की बदी को मिलाकर परसोत्तम महिना होता है I इस महीने में एक कांसी की थाली में तैतीस पूड़ा, गहना या रुपिया डालकर, ऊपर से दूसरी कांसी की थाली से ढककर, लाल कपड़ा में बाँधकर ब्राह्मण को दान करो I और आपसे जितना हो सके तो गंगा स्नान और पूजा – दान करो I
मिती पाक
हर सताइस दिन में मिती पाक आती है I इस दिन सताइस सेर कोई भी अनाज दान करो I इतना नहीं दे सको तो कम दे दो और आपका जो मन हो वो दान करो I जब मन हो तो मितीपाक का ऊजमन भी करो I
तारा लगना
साल में कभी – कभी तारा लगता है I तारा लगने के बाद कोई शुभ काम नहीं करना चाहिए I औरतें दूसरे गाँव नहीं जाती हैं I अगर जाना पड़े तो तारा उतरने के बाद आना होता है I जिस दिन तारा उतरे उसके एक दिन पहले नथ पहन कर, टीका लगाकर दूसरे दिन सिर नहाकर, मेहँदी लगाकर, खाकर, टीका लगाकर, नथ पहन कर तारा उतरने के बाद वापस आ जाओ I
चन्द्र – सूर्य ग्रहण
साल में कभी – कभी ग्रहण आता है I अमावस को सूर्य ग्रहण और पूर्णिमा को चन्द्र ग्रहण होता है I ग्रहण लगने के बाद खतम होने तक कुछ भी नहीं खाते हैं I कांसी के कटोरी में घी और सोना की टिकड़ी डालकर ( छाया पात्र ) डाकोट ( पड़िया ) को दान करो I हो सके तो हवन करो, तुला दान ( घी, अनाज, तुला ) करो I गरीबों को कपड़े – पैसे – अनाज दान करो I गाय को गुड़ – चना खिलाओ I ग्रहण शुद्ध होने के बाद गंगा स्नान करो I चन्द्र ग्रहण हो तो चन्द्रमा, सूर्य ग्रहण हो तो सूर्य का दर्शन करो I अगर किसी के पेट में बच्चा हो तो जब ग्रहण लगे तबसे और जब ग्रहण शुद्ध हो तबतक एक नारियल गोद में लेकर बैठे रहना चाहिए I कोई भी काम करने से बच्चे का अंग भंग होने का डर रहता है I