अंतिम संस्कार की विधि
जब प्राण निकलने वाला होता है तब मृतक का बेटा उनका सिर अपनी गोदी में ले लेता है I इसे ” गोडा देना “ कहते हैं I घर के सभी लोग उन्हें तुलसी पत्ती खिला देते हैं और गंगाजल पिला देते हैं I जब प्राण निकल जाता है तब शव को स्नान करवाकर उसे जमीन पर गोबर का लेप लगाकर रखा जाता है I
दाह संस्कार की सामग्री
- शुद्ध देशी घी ( सामर्थ्यानुसार )
- कपूर
- चंदन की लकड़ी और चंदन चूरा ( सामर्थ्यानुसार )
- पीपल, तुलसी
- चिता के लिए लकड़ी (2 1/2 कुन्तल) अथवा शव के अनुसार कम – ज्यादा
- चिता भूमि पर जीव कि शान्ति के लिए गाय का दूध ( सामर्थ्यानुसार )
उसके बाद शव का संस्कार किया जाता है I
शव संस्कार
शव को जल से स्नान करवा के नए वस्त्र से शरीर को पोंछ कर गोघृत ( गाय का घी ) का लेप लगाकर वस्त्र ( कौपीन ) पहना दें I चन्दन लगा दे I फूल और तुलसी की माला पहना दें I सुगन्धित द्रव्य का शरीर पर लेप कर दें I मुख के अंदर सोने का टुकड़ा डाल दें I सारे शरीर को नए वस्त्र से ढक दें और कुशासन बिछा कर उत्तर की तरफ सिर कर के लेटा दें I मोली से अच्छी तरह बाँध दें I ऊपर से रामनामी चादर ओढा दें I फूल की माला से सजा दें I उसके बाद जेष्ठ पुत्र ( बड़ा बेटा ) या श्राद्ध कर्ता स्नान कर के वस्त्र धारण कर 6 पिण्ड का निर्माण करें I
- पहला शव नामक पिण्ड मृतक स्थान पर दें I
- दूसरा पांथ नामक पिण्ड मृतक के दरवाजे पर दें I
- तीसरा खेचर नामक पिण्ड चौराहा पर दें I
- चौथा भूत नामक पिण्ड विश्रामस्थल पर दें I
- पाँचवा साधक नामक पिण्ड चिता भूमि पर दें I
- छठां अस्थि संचयनिमित्तक नामक पिण्ड अस्थि अस्थि संचय के समय प्रदान करें I
दाह क्रिया होने के बाद श्राद्ध कर्ता और अन्य बान्धव स्नान कर के मृतक तिलांजलि प्रदान करें I
देह त्याग के बाद के कृत्य
- अर्थी बनाने के लिए बांस आदि बिछाने के लिए कुशासन व चटाई I
- सफेद नया कपड़ा मलमल का ( लगभग 20 मीटर )
- सौभाग्यवती स्त्री के शव को पहनाने के लिए चुनरी और ढकने के लिए गोटेदार रंगीन ओढ़नी, अलंकृत करने ( सजाने ) के लिए सौभाग्य द्रव्य I
- शव को ओढ़ाने के लिए रामनामी चादर या सफेद चादर I
- शव को बाँधने के लिए मूँज की रस्सी, साथ में मौली या कच्चा सूत ( सौभाग्यवती स्त्री के शव को बाँधने के लिए मौली और पुरूषों के लिए सूत ) I
- अरथी सजाने के लिए फूल और फूलमाला
- अबीर
- इत्र
- रूई
- धूपबत्ती
- माचिस
- मिट्टी का घड़ा ( जल लाने के लिए )
- मिट्टी का दिया या थाली ( पिण्ड रखने के लिए )
- लोटा
- यज्ञोपवीत ( जनेऊ ) दो जोड़ा
- शव की परिक्रमा के लिए नारियल और गरी गोला ( पुरूषों के लिए नारियल, स्त्रियों के लिए गरी गोला )
- शव के ऊपर से उछालने के लिए चाँदी के सिक्के, रूई, धान का लावा, रूपए, सफेद फूल
पिंडदान की सामग्री
- जौ का आटा – आधा किलो
- तिल ( 100 ग्राम )
- शहद
- गाय का घी