शादी के बाद

बिदाई के बाद लड़की जब ससुराल पहुँचती है तब सास ससुर बेटा और बहू को गाड़ी से उतारते हैं I तब बहू अपनी सास को पैर छूकर बेला देती है जो कि उसकी माँ ने उसे बिदाई के समय दिया था (आधा सूखा नारियल में चीनी भरकर, रूपए रखकर, एक ब्लाउज पीस के साथ) I उसके बाद बहू गृह प्रवेश करती है I गृह प्रवेश करते समय दरवाजे पर सास अपने बहू और बेटे का आरता करती है I बहू की ननदें दरवाजा रोक कर खड़ी हो जाती हैं, फिर उन्हें  बाड़ ढूकाई का नेग दिया जाता है I

इसके बाद ” सात थाली वाला नेग “ किया जाता है I इसमें 7 थालियों में हल्दी से साथिया बनाकर एक लाइन में रखा जाता है I फिर लड़का चाँदी की सीक से हर थाली को घसकाता है  ( पहले दांय और फिर बांय और फिर इसी तरह आगे करता जाता है ) और फिर लड़की हर उस थाली को उठाती जाती जिसे लड़के ने घसकाया है I बस ध्यान रहे थाली को घसकाते समय और थाली को उठाते समय आवाज नहीं होनी चाहिए I फिर बहू और बेटे को थापे ( घर की दिवार पर देवी मांडी गयी है ) के आगे बैठा दिया जाता है I दोनों लोग देवी के आगे धोक खाते हैं I धोक खाकर लड़का खड़ा हो जाता है I फिर बहू घी और गुड़ को हाथ लगाती है I

इसके बाद ” जुवा का नेग “ होता है I यह नेग लड़के की भाभी या फिर मामी कराती है I एक परात में पानी, फूल और थोडा सा दूध डालकर उसमे चाँदी की अंगूठी ( ये वो अंगूठी है जो कि डाले के सामान में बटवे में रहती है ) डालते हैं I फिर लड़के और लड़की को पानी में से अंगूठी ढूंढनी होती है I जो पहले ढूंढ लेता है, वो जीत जाता है I फिर लड़का वो अंगूठी लड़की को पहना देता है I इसके बाद लड़का और लड़की एक दूसरे का ” कांगन डोरा “ खोलते हैं I डोरा को खोलकर जुवा के परात में डाल दिया जाता है I फिर ” जुवा का नेग ” दिया जाता है I

उसके बाद अपने शहर के मंदिरों में देवी-देवता के आगे बेटे और बहू को धोक खिलाया जाता है I देवी-देवता के आगे दोनों लोग आंखां डालते हैं I लड्डू, सुहाली और पेठा चढ़ाते हैं I नारियल पधारते हैं I रूपए चढ़ाते हैं I इसके बाद घर आकर लड़का और लड़की नहाकर तैयार हो जाते हैं I

इसके बाद ” सुहाग थाल “ की रस्म की जाती है I इस रस्म में घर में मूंग – भात कि रसोई बनायी जाती है I एक थाली में मूंग – भात डालकर उसमे घी और चीनी मिलाकर रखा जाता है I फिर 7 सुहागन औरतें बहू के साथ बैठती हैं और हर एक औरत बहू को 7 बार मूंग भात खिलाती है I उसके बाद सब लोग रसोई जीम लेते हैं I   

इसके बाद ननद अपनी भाभी का डाले के सामान से ” सिरगुत्थी “ करती है I फिर केसर धड़ी करती हैं I इसमें एक थाली में केसर, हिंगलू, तेल, मैन और इतर को मिलाकर ननद अपनी भाभी के मांग में साथिया बनाती है I फिर सात सुहागन औरतों के मांग में भी लगा देती है I इसके बाद ननद अपनी भाभी को चूड़ा पहनाती है I

इसके बाद घर की सभी बड़ी औरतें बहू की ” मूह – दिखाई ” करती हैं I इसके बाद बहू से ” पगा – लागनी “ करवाई जाती है, जिसमे बहू घर की सभी बड़ी औरतों का पैर छूकर उन्हें रूपए का लिफाफा देती है I फिर बहू से घर के सभी बड़े आदमियों का ” पैर पकड़वाया “ जाता है, फिर वो लोग बहू को नेग देते हैं I

इसके बाद ” मजगढ़ “ होता है I इसमें एक लाइन में सब बैठते हैं I पहले बहू के आगे ससुर जी, उनके आगे सास, उनके आगे लड़का, उनके आगे बहू और फिर उसके आगे देवर बैठते हैं I फिर देवर बोलता है – ” भाभी भाभी मजगढ़ पहलो बेटो मेरो, दूसरो बेटो तेरो ” I फिर देवर को नेग दिया जाता है I उसके बाद सभी लोग खड़े हो जाते हैं I

फिर जवाईं लोग दूल्हा – दुल्हन का कमरा सजवाते हैं I जवाईयों को कमरा सजाई का नेग मिलता है I उसके बाद ” सुहाग रात “ हो जाती है I