सगाई

 जब लड़का या लड़की का रिश्ता देखते हैं तब उनकी आपस में कुंडली मिलाई जाती है और उनका गोत्र देखा जाता है I गोत्र एक नहीं होना चाहिए I जब लड़की / लड़का का रिश्ता पक्का होता है तब सबसे पहले रोका किया जाता है I रोके में लड़कीवाले लड़के को और लड़केवाले लड़की को टीका लगाकर उन्हें अपने इच्छा के हिसाब से फल, रूपए, गहने और मीठा देते हैं I फिर मिलनी की रस्म की जाती है I मिलनी में लड़कीवाले लड़केवालों को रूपए देकर और गले लगकर रिश्ते को पक्का करते हैं I उसके बाद पंडितजी से पूछकर सगाई के लिए कोई अच्छा सा दिन निकलवाकर सगाई की जाती है I कुछ लोग शादी के पहले सगाई करते हैं और कुछ लोग शादी के दिन ही सगाई की रस्म कर लेते हैं I सगाई में लड़कीवाले लड़के को और लड़केवाले लड़की को टीका लगाकर पल्ले में तौलिया बिछाकर उसमे रूपए, नारियल, फल और मीठा देते हैं I लड़की को साड़ी, गहने और सभी श्रींगार के चीजें भी देते हैं I फिर लड़का और लड़की एक दूसरे को अंगूठी पहनाते हैं I अंगूठी पहनाने के बाद लड़कीवाले लड़के की रूपए से वारा – फेरी करते हैं और लड़केवाले लड़की की वारा – फेरी करते हैं I ये रूपए फिर नौकरों में बाँट दिया जाता है I इसमें मिलनी की रस्म भी की जाती है I दुल्हन की मम्मी औरतों की मिलाई करती है I लड़कीवाले और लड़केवाले अपने सभी जवाईयों का तिलक करते हैं I लड़कीवाले लड़केवालों को रूपए देकर ख़ुशी से गले मिलते हैं I 

सगाई के बाद कोई अच्छा दिन देखकर होने वाली बहू के लिए चूड़ा भी भेजते हैं I सगाई हो जाने के बाद, सगाई से लेकर शादी तक में जीतनें भी बड़े त्यौहार आते हैं ( जैसे कि – संक्रान्ति, होली, तीज, दिवाली ) उसमे लड़केवाले अपनी होने वाली बहू को अपनी इच्छा और शौक के अनुसार नेग / शगुन ( नेग में – कपड़े, मीठा, फल, गहनें, श्रृंगार के सामान और जो मन हो ) भेजते हैं I लड़कीवाले भी अपने होने वाले दामाद को संक्रान्ति और होली  पर अपनी इच्छा के अनुसार नेग भेजते हैं I