
बासेड़ा
Date: 25 March 2022
चैत बदी में होली के 6 – 7 दिन के अंदर सोमवार, बुधवार या शुक्रवार को “बासेड़ा” करते हैं I जिस दिन होलिका जलती है उस दिन का बासेड़ा नहीं करते है I
बासेड़ा के पहले दिन, दिन में खांटा (बाजरा के आटा में दही मिलाते हैं) डालते हैं I खांटा डालने के बाद बासेड़ा के दिन रात तक सूई हाथ में नहीं लेते हैं और झाड़ू नहीं लगाते हैं I कुंडारा भरने के ले लिए एक बड़ा कुंडा ( मिट्टी का बाउल जैसा ) , दस छोटी कुंडारी (मिट्टी का दीया), एक टूट्टी की करी (हांड़ी), एक राबड़ी के लिए हांडी मंगाकर, शाम को पानी में भिगो दो I दूसरे दिन ठंडा खाने के लिए रसोई में राबड़ी, बाजरा की रोटी, मीठा भात, गुलगुला और जो मन हो वो बना लो I मोठ – बाजरा भिगो दो I रसोई बन जाने के बाद रसोई घर में दिवाल पर घी का थापा देकर, सामने दीया जलाओ I जल, रोली और चावल से पूजा करो I मूंग चावल का आखां डालो I ” दो शीतला माता का, एक हनुमान जी का और एक भैरूजी ” का गीत गाओ I मेहँदी लगा लो I
बासेड़ा के दिन सुबह नहा कर अगर कुंडारा भरते हो, तो हर एक छोटी कुंडारियों ( मिट्टी के दीये ) में भिगोया हुआ मोठ – बाजरा, राबड़ी, दही, मीठा भात, गुलगुला भरकर, होली की झल दिखाया हुआ सूत से लपेट कर, पीसी हुई हल्दी से साथिया करके रखो I उसके बाद इन कुंडारियों को उस बड़े कुंडे में रख दो I उसके बाद घर के सभी लोग कुंडारा की पूजा करते हैं I करी में जल और घी या मक्खन डालकर, कुंडारा और पूजा का सामान लेकर “शीतला माता का गीत” गाते हुए शीतला माता के मंदिर जाते हैं I पूजा के सामान के लिए एक थाली में – राबड़ी, रोटी, भात, दही, चीनी, मूंग की दाल, बाजरा की मोई (बाजरा के आटा में घी और पीसी चीनी मिलाओ), बड़कुल्ला की जेल (माला), भिगोया हुआ मोठ – बाजरा, हल्दी में रंग के टुकड़ी (सूखे नारियल के टुकड़े), जल, रोली, मोली, चावल, दीया, धूपबत्ती और दक्षिणा डालकर शीतला माता के मंदिर जाओ और सब कोई हाथ लगाकर शीतला माता को चढ़ाओ I जो हल्दी की गाँठ होलिका दहन की अग्नि को दिखाया था, उसे पीस कर माता को चढ़ाओ I शीतला माता की पूजा कर के “कहानी ” सुनो I कहानी नीचे लिखी है I शीतला माता को जल का कलसा (लुटिया) चढ़ाओ I पूजा किया हुआ जल सब आँख में लगाओ I शीतला माता को बड़कुल्ला की जेल भी चढ़ाओ और धोक खा लो I फिर माटी में जो दूब लगायी है, उसे साथ में लेकर, “बधावा” गाते हुए घर वापस आ जाओ I
घर आकर मोठ – बाजरा – रुपिया पर बाना निकालकर सासुजी को पैर छूकर दे दो I बहन – बेटियों का भी बाना निकालकर भेजो I अगर हो पाय तो एक बूढ़ी मिसरानी और एक कुँवारी लड़की को ठंडा खिलाकर, सब कोई ठंडा खाओ I दूब पैंडा पर रख दो I जब आपके लड़का होए या फिर लड़के की शादी होए तो उस साल ऊजमन करो I
बासेड़ा का उजमन
जब आपके लड़का होए या फिर लड़के की शादी होए तो उस साल ऊजमन करते हैं I जितना कुंडारा हर साल भरते हैं, उसका दोगुना ऊजमन में भरते हैं I फिर उस कुंडारे के ऊपर साड़ी – ब्लाउज और रूपए रखकर सासुजी को पैर छूकर दे देते हैं I
बासेड़ा की कहानी
एक बुढ़िया माई थी, जिकी बासेड़ा न ठंडी रोटी खाती और शीतला माता की पूजा करती I गाँव म और कोई भी कोनी करतो I एक दिन सारा गाँव म आग लगगी, सारा गाँव जलगो पर बुढ़िया माई की झोपड़ी कोनी जली I सब कोई आकर पूछन लाग्या कि या के बात है, बुढ़िया माई तेरी झोपड़ी कोनी जली I बुढ़िया माई बोली कि म बासेड़ा न ठंडी रोटी खाऊँ और शीतला माता की पूजा करूँ हूँ, जिक स कोनी जली I थार सबकी जलगी I सब कोई सारे गाँव म हेलो फेरा दियो कि बासेड़ा न और बुड्डा बासेड़ा न सब कोई ठंडी रोटी खायो, शीतला माता की पूजा करियो I जिक दिन स सब कोई शीतला माता न धोक न लाग्या I हे शीतला माता ! बुढ़िया माई की रक्षा करी बैयाँ ही सब की करिए, बाल – बच्चा की, म्हारी सबकी करिए I ईक बाद बिन्दायकजी की कहानी सुनो I
बिन्दायकजी की कहानी
एक विधवा मालन थी, ऊं क एक चार बरस को भोत सुन्दर लड़को थो I मालन की सासू ऊ न भोत दुःख देती I एक दिन सासू न दोनू जना न घर स निकाल दी I दोनू जना उठ स चल्या गया I चालता – चालता दूर जाकर एक गाछ क नीच बैठगा I गाछ क सामन बिन्दायाकजी को मंदिर थो I दुनिया दर्शन कर न आती जिकी उनां न प्रसाद बाँट जाती , जिक स ऊना को पेट भर जातो I दोनु जना बठ ही रहन लागगा और बिन्दायाकजी को भोत सेवा – पूजा करन लागगा I एक दिन मालन सोची कि आपां जंगल स फूल ल्याकर, पूजा की सामग्री और प्रसाद बेचां तो आपन भोत पीसा आन लाग जासी ब लोग दुकान खोल ली I खूब बिक्री होन लागी I पीछ बी बिक्री कर न ताई आदमी राख लियो और आप बिन्दायकजी की सेवा – पूजा कर न लागगी I धीर धीर कमाई हों लागगी तो मकान करा लियो I मुनीम – गुमास्ता राख कर और बड़ी दुकान खोल ली I लड़का न पढ़ न भेजन लागगी I लड़को पढ़ न जातो बठ राजा की लड़की भी जाती, ऊँ स भोत दोस्ती होगी I लड़को राजा क घरां भी जान लागगो जिकी बी लड़का न इतनो सुन्दर देखकर आपनी भाभियाँ न बोली कि म तो इस स ब्याह करुँगी I भाभियाँ आप क सासु – सुसरा न जाकर सारी बात बताई I राजा बोल्यो कि ठीक है अगर प्रतिज्ञा कर ली है तो आपां न करनो पड़सी I खूब धूम – धाम स लड़की को ब्याह कियो, भोत दायजो दियो I मालन भोत राजी होई I बेटा – बहू न आटा देखकर पहले बिन्दायकजी क मंदिर म धोक दिवाई, पिछ घरां ल्याई I सारा गाँव म ढिंढोरा पिटवायो कि बिन्दायकजी की सेवा -पूजा करन स दुखी आदमी भी सुखी हो जाव I या सुनकर और दुनिया दर्शन करन आन लागगी I बेटो काम सम्भालन लागगो I मालन और भी सेवा – पूजन करन लागगी I बठी सासु के अन्नदाता बैर पड़गो, जिको रूलता – रूलता एक दिन अठ आगा I आकर लड़का न बोली कि म न नौकरी राख ले, खाली रोटी – कपड़ा दे दिए I म सारो काम कर दूंगी I लड़को राख लियो I दोनूं एक दूसरा न पहचान्या कोनी I मालन थोड़ी देर म पूजा कर क आई, देख तो सासू काम कर है I सासू न पूछी थे अठ काम कैयां करो हो I सासू बोली कि अठ को सेठ मन नौकरी राखी है I जद बहू बोली कि सासुजी यो तो थारो ही पोतो है, या बहू है, यो आपनो ही मकान है I थे तो म्हा न काड़ दिया था, पर बिन्दायकजी म्हारी लाज राखी है I सासू भोत शर्मिन्दा होई I बोली कि मेरी करनी म भोग लेई I बहू बोली सासूजी अब थे अठ ही रहो, पोता का सुख देखो I सासू बठ ही रहन लागगी I हे बिन्दायकजी महाराज ! जिसो मालन न धन दियो बिसो सब न दियो I कहतां न सुणतां न, आपणां सब परिवार न दियो I