
आसमाता की पूजा
Date: 6 March 2022
आसमाता का व्रत
फागुन सुदी एकम से अष्टमी तक कोई भी अच्छा दिन देखकर व्रत करो । इस दिन कहानी सुनो । कहानी सुनते समय एक पाटा पर जल का लोटा, गेहूँ, रोली, चावल, बाना के लिए सीरा-पूड़ी रखो । लोटा पर सथिया कर के चावल चढ़ाओ । सात दाना गेहूँ का हाथ में लेकर आसमाता की कहानी सुनो । कहानी नीचे लिखी है I सीरा-पूड़ी और रुपिया पर बाना निकाल कर सासुजी को पैर छूकर दे दो । फिर एक समय खाना खा लो ।
आसमाता का उजमन
जब लड़का हो या लड़के का विवाह हो, तो उजमन करो । कहानी सुनने के बाद बाना में साथ जगह चार-चार पूड़ी और सीरा, एक साड़ी और रुपिया रखकर, हाथ फेर कर सासुजी को पैर छूकर दे दो । सात ब्राहमणियों को भोजन कराओ ।
आसमाता की कहानी
एक आसलिये बाबलिये थो । जुओ खेल्या करतो और हारे-जीते दोनूं का ब्राह्मण जिमा तो । एक दिन भाभियां बोली कि यो हारे-जीते दोनूं का ब्राह्मण जीमाव सो कईयां पार पड़सी । ई नगर स निकाल दो । बो घर स निकल कर शहर चल्यो गयो और आसमाता की आस कर क बैठ गयो । सारा शहर म खबर फैलगी कि एक जुआ को भोट बड़ो खिलाड़ी आयो है । एक दिन राजा न बेरो पाट्यो, तो ऊँ न खेलन बुलायो और जुआ म सारो राज-पाट हारगो । आसलियो बावलियो राज करन लाग्यो । ऊँका भाई-भाभियां क अन्नदाता बैर पड़गो । वा लोग आसलिया बावलिया न ढूंढ न निकल्यो । चालता-चालता ब ई शहर म पहूँच्या और सुन्या कि एक आदमी जुआ म राज जीतगो । वा लोग नया राजा स मिल न गया और बोल्या की म्हारो एक बेटो थो आसलियो बावलियो, वो भी जुओ खेलतो । म्हे ऊँ न घर स निकाल दिया । जब वो बोल्यो म ही थारो बेटो हूँ – ‘थारी करणी थारे हाथ, मेरी करणी मेरे हाथ’ । ऊँ की माँ बोली कि आसमाता इतनो दियो है, आपां देश चाल कर उजमन करांगा । देश जाकर उजमन करयो और सुख स राज पाट करना लाग्या । हे आसमाता ! आसलिया बावलिया न दियो, जिसो सब न दिये । कहतां न, सुणतां न, हुंकारा भरतां न, आपना सारा परिवार न देइये । इसके बाद बिन्दायकजी की कहानी सुनो ।
बिन्दायकजी की कहानी
विष्णु भगवान लक्ष्मीजी न ब्याहण जान लाग्या I जद सारा देवी – देवता न जनेत म लेजान बुलाया, जाण लाग्या तो सब कोई बोल्या, की गणेशजी न तो कोनी ले जाव क्यूँकी – सवा मण मूंग, सवा मण चावल, घी को तो कर कलेवो – जीमण फेर बुलाओ दुन्द दुन्दालो, सुन्ड सुन्डाला – उखला सा पाँव – छाजला स कान – मस्तक मोटो -लाजे भीमकुमारी, लाजे कुनणापुर की नारी I इन साग ले चाल क के करांगा, इन तो घर की रखवाली छोड़ जावांगा I पिछ सब कोई बारात में चल्या गया I बठी न नारदजी गणेशजी न बोल्या कि थारो तो भोत अपमान कर दियो, बारात बुरा लागती जिक स था न अठई छोड़गा I जद गणेशजी चूहा न आज्ञा देई, कि सारी धरती न थोथी कर दो I थोथी होन स बठी न भगवान का रथ का पहिया धरती म धसगा I सब कोई निकालन लाग्या, पर पहिया निकल्या कोनी I जद किसान खाती न बुलायो गयो I बो आकर पहिया क हाथ लगाकर बोल्यो – जय गणेशजी और रथ निकलगो I सब कोई पूछ्या कि गणेशजी न क्यूँ समयो I खाती बोल्यो – गणेशजी न सुमरे बिना कुछ भी काम कोनी सिद्ध होव I सब कोई सोच्या कि म्हे तो संदेही गणेशजी न छोड़ आया I पिछ सब कोई उनां न बुला क ले और पहले तो गणेशजी न रिद्धि -सिद्धि परणाई, पिछ विष्णु भगवान न लक्ष्मीजी परणाई I हे बिन्दायकजी महारज, जिसो भगवान को कारज सिद्ध कियो, बिसो सबको करियो I कहता न, सुनता न हुंकारा भरता न सबको करियो I म्हारा भी करियो I