
दिवाली
Date: 24 October 2022
छोटी दिवाली
कार्तिक बदी चौदस (बड़ी दिवाली के एक दिन पहले) को ” छोटी दिवाली ” होती है । इस दिन सुबह उबटन ( आटा, तेल और हल्दी मिलाकर ) लगाकर, गरम पानी से सिर नहाते हैं । इसलिए इसे रूप चौदस भी कहते हैं I इस दिन रात को दिवाल पर गणेश – लक्ष्मीजी का चित्र लगाते हैं और एक थाली में ग्यारह दीया सजाकर रख लेते हैं I फिर एक पाटे पर दीया की थाली रखके सभी दीया को जला देते हैं I फिर घर के सभी लोग दीया को रोली – चावल से चिरच लेते हैं I फिर घर का कोई भी हर दीये में लावा का एक – एक दाना डाल देता है I सब कोई टीका लगाकर धोक खा लेते हैं I फिर सभी दीयों को पूरे घर में सजा देते हैं और एक दीया उसी थाली में लक्ष्मीजी के आगे जलता छोड़ देते हैं I इस दिन हनुमान जयंती भी मनाते हैं I
बड़ी दिवाली (24 Oct 2022)
दिवाली की मिठाई – दिवाली पर मिठाई बनाते हैं । मिठाई छुत्ती निकाल कर ब्राह्मण को दो । अपनी बहन-बेटियाँ को मिठाई भेजो ।
कार्तिक की अमावस को ” दिवाली ” होती है । इस दिन सुबह हनुमानजी, पीतरजी के धोक लो । जल, रोली, मोली, चावल, फूल, मिठाई, अबीर-गुलाल, दक्षिणा चढ़ाओ । नारियल पधार कर चढ़ाओ । धुप-दीप करो । आपका मन हो ती लक्ष्मीजी का व्रत कर लो । दशहरा में जो बही-बसना बनने दिया था, उसे भी मंगा लो । घर में सब कोई पैसे के हाथ लगाकर, वही पैसे को तेल में डालकर भैरूंजी को या फिर चोराहे पर चढ़ा दो । शाम को दाल का सीरा, पूड़ी, बड़ा, कैरिया, फली, पापड़ और आपका जो मन हो वो रसोई बनाओ । ग्यारह पूड़ी और सब तरह की थोड़ी-थोड़ी चीजें देवी-देवता के नाम की निकाल कर ब्राह्मण को दे दो । ब्राह्मण को भोजन कराओ । शाम को खाने के पहले घर की कोई स्त्री जिसने व्रत रखा है वह सूरज की साख में ( दिन छिपने के समय ) गणेश – लक्ष्मीजी के आगे दीया जलाती हैं । सब रसोई का भगवान को भोग लगाकर छूता निकाल देते हैं I फिर घर के सभी लोग जीम लेते हैं I फिर सब लोग तैयार होकर गणेश – लक्ष्मीजी की पूजा करते हैं I दिवाल पर बने गणेश – लक्ष्मीजी के सामने पाटा पर लाल कपड़ा बिछा कर बाजार से लाए हुए गणेशजी-लक्ष्मीजी या फिर चाँदी / पीतल के गणेश – लक्ष्मीजी को बैठाते हैं I एक थाली में 21 दीया सजाकर रख लेते हैं और उसमे बाती डालकर जला देते हैं । जल, रोली, मोली, चावल, फूल, फल, मीठा, गुड़, दूब, खड़ा धनिया, पान, लौंग, इलायची, अबीर-गुलाल, दक्षिणा चढ़ाते हैं । 4 पूड़ी और सीरा भी चढ़ा देते हैं । मूंग-चावल का आखां डालो । फिर एक थाली में एक दीया जलाकर आरती कर लेते हैं I फिर टीका काढ़ कर धोक खा लेते हैं I घर के सभी बड़ों का पैर छूतें हैं I अपनी बहूओं को रुपिया दो । बहूवें भी सासुजी को पैर छूकर रुपिया दती हैं। फिर थाली में से सभी दीयों को पूरे घर में सजा देते हैं I बीच वाला एक दीये को थाली में ही छोड़ देते हैं I इस दीये को रात भर जलते रहने देते हैं I इसी दीये के ऊपर एक और दीया रखकर उसमे काजल बना लेते हैं I अगले दिन गणेश – लक्ष्मीजी की पूजा करके घर की सभी औरतें लक्ष्मीजी की कहानी सुनती हैं I फिर घर के सभी लोग की आँख में काजल लगाया जाता है I दक्षिणा में चढ़ाय रूपए को तिजोरी में रख दो । गणेशजी- लक्ष्मीजी की मूर्ति ( चाँदी / पीतल ) वाली अपने मंदिर में उठा कर रख लो । अगर मिट्टी के गणेश – लक्ष्मीजी हैं तो उन्हें भी रख लेते हैं और अगले साल दिवाली के अगले दिन अन्य सामानों के साथ विसर्जन कर देते हैं I
प्रीति मिलन
कार्तिक में दिवाली के दूसरे दिन सब लोग अपने सगे सम्बन्धी और दोस्तों से मिलते हैं । स्त्रियाँ अपने से बड़ी औरतों के पैर छूकर रुपए देती हैं ।