जनेऊ

जनेऊ संस्कार को यज्ञोपवीत संस्कार / उपनयन संस्कार / व्रतबंध / बरुआ   भी कहा जाता है I

यज्ञोपवीत का अर्थ है – यज्ञ (समाज), उप (समीप), वीत (ले जाना) ; अर्थात समाज के समीप ले जाना I यह हिंदू संस्कृति का चिन्ह है I युगों से आई हुई एक परम्परा है, जिसके द्वारा हम आत्मपवित्रता का अनुभव लगते हैं I

यह संस्कार हो जाने से पदार्थ या व्यक्ति किसी विशेष कार्य के योग्य हो जाता है I जिस प्रकार मणियों को तराश कर उसे चमकीला और धारण करने योग्य बना दिया जाता है, जिस प्रकार औषधियों का संस्कार करके उसे जीवन उपयोगी बना दिया जाता है ; उसी प्रकार मनुष्य भी संस्कार हो जाने से समाज के लिए उपयोगी बन जाता है I इसीलिए सभी जातियों में किसी न किसी रूप में हर मनुष्य का संस्कार होता है I      

यह संस्कार सभी मारवाड़ी परिवारों में नहीं होता है I किसी में होता है और किसी में नहीं होता है I पर जिसमें होता है उसकी विधि इस प्रकार है

1) सबसे पहले गौरी – गणेश, कलश और नौग्रह आदि का पूजन होता है I

2) फिर अष्टभांड का पूजन होता है I इस पूजन में 8 कलश / 8 गिलास रखा जाता है I हर एक कलश / गिलास के ऊपर गमछा, फल और दक्षिणा रखा जाता है I 

3) फिर यज्ञोपवीत / जनेऊ का पूजन होता है I इसमें लड़के को ब्राह्मण द्वारा गायत्री मंत्र दिया जाता है I

4) गणेश पूजन में जो कलश रखा है ( यह अष्टभांड पूजन वाला कलश नहीं है- गणेश पूजन में भी 1 कलश रखा जाता है ) उसमें जनेऊ को 5 बार छुवाया जाता है I उसके बाद वह जनेऊ लड़के को पहना दिया जाता है I 

5) जनेऊ पहना देने के बाद लड़के को नए वस्त्र पहना दिया जाता है I

6) फिर लड़के (जिसका जनेऊ संस्कार हो रहा है) को भोजन कराया जाता है I उसके साथ 7 और अविवाहित लड़कों ( घरवाले भी हो सकते हैं / बाहरवाले भी हो सकते हैं) को भोजन करने के लिए बैठाया जाता है I 

7) भोजन के बाद यह आठों कलश इन सभी को दे दिया जाता है ( जिस लड़के का जनेऊ संस्कार हो रहा है उसे और 7 लड़के जो साथ में बैठकर भोजन किये हैं ) I  

9) फिर बहन – बेटी लापर ( आँचल ) फैलाती हैं I उनको आँचल में अच्छे से अपनी इच्छानुसार नेग दिया जाता है I 

10) जनेऊ संस्कार हो जाने के बाद लड़का सभी घरवालों से ( माँ, मामा, मामी, मौसी, भुआ, ताई, चाची आदि ) कहता है कि मैं जा रहा हूँ काशी पढ़ने, मुझे आप लोग भिक्षा दीजिये I फिर सभी लोग ( माँ, मामा, मामी, मौसी, भुआ, ताई, चाची आदि ) उसे भिक्षा देते हैं I भिक्षा में रूपए / कपड़ा / द्रव्य आदि अपनी इच्छानुसार कुछ भी दे सकते हैं I फिर लड़के का मामा कहता है कि तुम बाहर मत जाओ , हम तुम्हे यहीं पढ़ा देंगे ; तुम्हारा विद्या – अध्यन यहीं करा देंगे I फिर जिसके बच्चे का जनेऊ होता है वह सभी बहन – बेटी को अपनी इच्छानुसार नेग देता है I 

11) जनेऊ संस्कार के समय :

       i) परिवार में अगर कोई विवाह का कार्यकर्म होता है तो जिस लड़के का जनेऊ संस्कार हो रहा है उसके सिर का बाल नहीं मुंडाया जाएगा I 

      ii) परिवार में कोई विवाह का कार्यकर्म नहीं है, केवल लड़के का जनेऊ संस्कार ही है तब लड़के का बाल मुंडाया जाएगा I