बृहस्पतिजी की कहानी
एक भोत गरीब ग्वालिया को छोरो थो I गायां चरातो फिरतो I एक दिन बिक बृहस्पतिजी महाराज आया I कयो कि छोरा तेरा गायां तो म चरा ल्याऊंगा, तू म न नुहा दे, मेरी धोती धोदे I छोरो बोल्यो कि म गायां भी चारा लाऊंगा, था न नुहा भी देऊँगा और थारी धोती भी धो दूँगा I बृहस्पतिजी बोल्या कि भई जो म न नुहाव, बिक घरां म जीम भी करूँ हूँ I छोरो कयो कि जीम भी लियो I माँ न जाकर बोल्यो कि आज ए बटऊ न जीमण खातिर नूतो दियो हूँ I माँ कयो कि के आंट है, चार रोटी बनाई पड़ी है, दो तो बिन दे देवांगा, एक – एक आपां खा लेवांगा I बटऊ आयो, कयो कि ल्या छोरा अब जिमा I बटाऊ न जीमण बैठा दियो, दो रोटी और करेला को साग घाल दियो और कयो कि जिमो महारज I बृहस्पतिजी बोल्या कि छोरा इसी रोटी जिमावगो के I छोरो कयो म्हार तो इसी को भी घाटो है I बृहस्पतिजी दोनूं रोटी खाकर बोल्या कि म तो छाक्यो कोणी I दो रोटी और थी, जिकी भी घाल दी I खाकर बोल्या कि छोरा सात तरह क नाज का थोडा – थोडा दान ल्या I छोरो मोदी क स लियायो I बृहस्पतिजी कयो कि थार घर क स गला कूणा म पूर दे I पूर दियो, तो सात टाकणा धन क भरगा I बृहस्पतिजी महारज पीला घोड़ों प, पीला कपड़ा पैर क जां लाग्या, तो छोरा की माँ गैल भागी और बोलन लागी कि ठहरो महारज I बृहस्पतिजी बोल्या कि अभी तू धन धन स धापी कोनी के I छोरा की माँ बोली कि म तो धापगी, पर आप कुन हो, यो तो बताओ I बोल्या कि म बृहस्पति हूँ I जद बा कयो कि आप तो म्हारो भोत उपकार करया हो, म आपकी सेवा करुँगी I बृहस्पतिजी बोल्या कि बृहस्पतिवार न केला की गाछ की पूजा करें, पीलो नाज खावो, पीलो पहनो I दान करो तो पीला घोड़ो, पीला नाज, पीली दक्षिणा, पीलो फूल देव I म इतना म ही राजी हो जाऊं हूँ और अन्तरध्यान होगा I वा हमेशा बृहस्पतिवार न ये चीजां स पूजा करन लागी व् घर म सब बात का सुख होगा I हे बृहस्पतिजी महारज ! जिसे बी छोरा और बिकी माँ न ठुठ्या, जिस सब न ठुठियो, अपना सारा परिवार न ठुठियो I