बुध आठ
जिस महिना की सुदी की आठ न बुधवार पड़, जिक दिन ‘बुध आठ’ का व्रत करते हैं I एक पाटा पर जल के लोटे में साथिया बनाकर, एक गिलास में गेहूँ रखकर गेहूं का आठ दाना हाथ में लेकर कहानी सुनो I चीनी – रुपिया पर बाना निकालकर सासुजी को पैर छूकर दे दो I जल पेड़ में डाल दो I इसी तरह आठ व्रत करो और नौवें में उजमन कर दो I उजमन के दिन ब्राह्मणियों को और एक ब्राह्मण को खीर – पूड़ी की रसोई खिलाओ I एक – एक ब्राह्मणियों को ब्राह्मण को किसी भी बर्तन में चीनी, चावल या फल और दक्षिणा दो I अगर आपका मन हो तो कपड़ा भी दे दो I और सब के आगे हाथ जोड़ कर कहो कि – ” मेरा माँ – बाप कोई भी जूणी म होव, जिक म स निकलकर बैकुंठा चल्या जाव ” I
बुध आठ की कहानी
एक साहुकारनी क एक बुधियो नाम को बेटो और एक बुधणी नाम की बेटी थी I साहुकारनी रोजिना मोल को आटो पीसती, ऊँ म स एक पाँव चोर कर राख लेती I बुधणी कहती कि माँ, थे आटो चोरी कर मतना राख्या करो, पर वा मानती कोणी I एक दिन माँ पांच – सात दिन क लिए पीहर जां लागी, तो बुधणी न बोली कि पीसना न पीस क दे दियो और एक पाँव आटो राख लिए I पिछ स बुधणीआटो पीस क दे देती, पर आटो राखती कोनी I पांच – सात दिन बाद बुधणी की माँ पीहर स आकर गेहूं ल्यान न गयी I सब जनी बोल न लागी कि तू तो चोरटी है, म्हारो आटो राख लेती I तेरी बेटी पूरी आटो देती, सो अब म्हे ट न पीसनो कोणी देवां I घरां आकर बेटी न भोत मारी और कयो कि मेरो कुमाई छुड़वादी I आपना बेटा न बोली कि इन घर स काढ़ दे, चाहे काला कुता स ब्याह दे I भाई वर ढूढ़न निकल्यो I भगवान् सोच्या कि ई न हर कोई क साग ब्याह देसी, तो आपना सत कुन मानसी I भगवान काला कुता को भेष धर कर आया, तो बुधियो बी क ही टिक्को कर दियो I सार गाँव म भगवान क ब्याह की तैयारी होन लागी I दर्जी, मोची, सुनार, लुहार सब उनां का काम म लागरया था I बुधणी की माँ मोढी कन गयी, बोल्यो कि मेरी बेटी को ब्याह है, जिको घाट चोलो रंग दे I मोढी बोल्यो कि म्हे तो भगवान क ब्याह की चुनड़ी रंगा हाँ, सो म्हा न फुर्सत कोणी I दर्जी क न गयी और बोली कि घाघरो – कब्जो सीम दे I दर्जी भी नटगो बोल्यो कि म तो भगवान का बागा – दुपट्टा सीमूं हूँ I पिछ आगी न सुनार क गयी बोली मेरी बेटी का कांवला गुजरी घड़ दे I सुनार भी नटगो कि म तो भगवान का, बुधणी का गहना घडूं हूँ I जाव जठ यो ही, जवाब मिला I घरां आकर बेटी न मारन लागी, कयो की तू ऐसी निरभागणी है, तेर तो ब्याह को काम भी कोई कोणी कर I भगवान कुत्ता को भेष धर क, बारात लेकर जान लाग्या I सारा गाँव म रेलों होगो कि बुधणी की माँ कुता क साग ब्याह कर है I बुधणी भगवान न बोली कि हे भगवान सारो गाँव हांसी घाल है, आप यो रूप छोड़ कर असली रूप दिखाओ I भगवान ब्याह होन क बाद विदा होन लाग्या, तो भोत सी बारात हाथी, घोड़ा, भोत सा गहणा पैर कर, बुधणी न साग लेकर चाल्या I सारो गाँव देखन लाग्यो, कयो कि कुता का साग ब्याह कर था, पर य तो सत की थी, जिक स भगवान ब्यावण आया I बुधणीजी न भोत दिन होगा सासर म राहतां, जद एक दिन सहेली बोली कि भगवान थारा लाड़ तो भोत कर है, पर सातवाँ कोठा की चाबी तो कोणी देव I बुधणी भगवान न बोल्या कि भगवान सातवाँ कोठा म के है, म कोनी देखी सो मन चाबी देओ I भगवान बोल्या चाबी मतना मांग, पछ्तावेगी I पर व मानी कोनी I खोल क देख तो माँ कीड़ा क कुंड म पड़ी है I बुधणीजी भगवान न बोल्यो कि मेरी माँ न कुंड म स काढ़ कर बैकुंठा ले जाओ I भगवान बोल्या कि वा तो आप क कर्म का भोग है I बा सबका आटा चुराती, जिक दोष स कुंडा म पड़ी है, थे पूरो देता, जिक फल स मेर साग ब्याहा हो I बुधणीजी कयो हे भगवान ! आप क जिसा जंवाई भी मेरी मा क होयां या जूण कोणी छूटसी, तो कद छूटसी I भगवान बोल्या कि तेरी भाभी बुध आठ को बरत – उजमन कर, जद थारी माँ की जूण छूटसी I इतनो सुनतां ही लुहारी को भेष बनाकर पीहर गयी I बठ ऊँना की भाभी क टाबर होन वालो थो, भोत दुःख पाव थी I लुहारी बोली कि म न हाथ लगान द्यो, तो टाबर हो जासी, पर पिछ म बोलूँगा बैया करनो पड़सी I जद व कयो ठीक है I भाभी क टाबर होगो पिछ लुहारी बोली कि चानण पख म आठ क दिन बुधवार पड़, जिक दिन बुध आठ का आठ बरत करिए I नौवां बरत म उजमन कर क कह दियो कि ” मेरा माँ – बाप कोई भी जूणी म होव, जिक म स निकलकर बैकुंठा चल्या जाव ” I बुधिया की बहू अइयां ही बरत उजमन करी, तो ऊँकी माँ न लेन खातर विमान आगो I पिछ बुधियो, बुधणीजी न पुछ्यो कि थे कुण हो I बुधणीजी सारी बात बता दी और सार गाँव म हेलो फेरा दियो कि सब कोई बुध आठ को बरत करियो, कहानी सुनियो I हे बुध आठ माता ! जिसी बुधणीजी न टूठयो, जिसो सब न टूठियो I कहताँ न, सुनतां न, हुंकारा भरतां न आपना सारा परिवार न टूठियो I बुधणीजी की माँ न बैकुंठा भेजी, जिसी सब न भेजियो, म्हान भी भेजियो I ई क बाद बिन्दायक की कहनी कहव I
बिन्दायकजी की कहानी
गणेशजी महाराज एक सेठजी क खेत म स निकल रहा था, तो बारा दाणा नाज का तोड़ लिया I पिछ गणेशजी क मन म विचार होगो कि म तो सेठजी की चोरी करली I गणेशजी, सेठजी क बारा बरस की नौकरी पर लाग्या I एक दिन सेठाणी निमट कर राख स हाथ धोन लागी, तो गणेशजी सेठाणी को हाथ मरोड़ क राख खोसली और माटी स हाथ धुआ दिया I सेठाणी सेठजी न बोली कि इसो के नौकर राख्यो है, जिको नौकर की जात होकर मेरी हाथ मरोड़ दिया I सेठजी गणेशिय न बुला क पूछ्या कि तू सेठाणी को हाथ क्यूँ मरोड्यो I जद वो बोल्यो कि म तो सीख की बात बताई हूँ, या राख स हाथ धोव थी, सो राख स भी कदे हाथ शुद्ध होया कर है के I राख स हाथ धोन स घर की रिद्धि – सिद्धि चली जाव, माटी स हाथ धों स आव I सेठजी सोच्या गणेशिय है तो स्यानो I थोड़ा दिन बाद कुम्भ के मेलो आयो, तो सेठजी बोल्या कि गणेशिया, सेठाणी न नुहाल्या I गणेशियो लेगो I सेठाणी किनार प बैठ क न्हान लागी, तो आगी न ले जाकर गोता खुवा ल्यायो I घरां आकर सेठाणी, सेठजी न बोली कि गणेशिया का ये के काम I मेरी इज्जत ले ली, इतना आदमियां बीच म मन आगी न घसीट कर नुहा – ल्यायो I गणेशिया न बुलाकर पूछ्यो, तो बोल्यो कि किनार बैठ कर छबलका कर थी, सब क न्हायेड़ा जल स न्हाव थी I आग न न्हान स अगल जनम म भोत बड़ो राजा और राजपाट मिलगो, जिक स नुहा ल्याहो I सेठजी सोच्या गणेशिय है तो स्यानो I एक दिन घर म हवन होव थी, सेठजी बोल्या कि गणेशिया सेठाणी न हवन म बैठ न बुलाल्या I सेठाणी न बुलान गयो I सेठाणी काली आंगी पहर क चालन लागी, तो आंगी फाड़ दी और बोल्यो कि लाल आंगी पहर क चाल I सेठाणी रूस क सोगी I सेठजी आकर पूछ्यो कि के बात है I सेठाणी बोली कि गणेशिया मेरी आंगी फाड़ दी I गणेशिया न बुलाकर बोल्या कि तू भोत बदमाशी कर न लाग्यो है I गणेशिया कयो कि सेठाणी काली आंगी पैर क जाव थी, म तो वा कढ़ा कर लाल आंगी पैर न बोल्यो I काली आंगी शुभ काम म पैर न स काम सफल कोनी होव I सेठजी सोच्या गणेशिय है तो स्यानो I एक दिन सेठजी पूजा कर न लाग्या, तो पंडित बोल्यो कि म्हे तो गणेशजी की मूर्ति ल्यानो भूलगा I गणेशिया बोल्या कि थे म न ही मूर्ति कर क विराजमान कर ल्यो I थारो सारो काम सफल हो जासी I या बात सुनकर सेठजी न भी गुस्सो आ गयो, बोल्यो कि अभी तक तो तू सेठाणी स मस्करी करी थी, अब मेर स भी कर न लाग्यो I गणेशजी बोल्या कि मस्करी कोनी करूँ, सच्ची बात कहूँ हूँ I इतनो कह क गणेशजी को रूप धर लियो I सेठ – सेठाणी सदा ही गणेशजी की पूजा करी I पूजा ख़तम होता ही गणेशजी अन्तरध्यान होगा I सेठ सेठाणी क भोत धोखो होयो कि आप न तो सदेही ही गणेशजी रहता, आप ऊँन स इतनो काम करायो I गणेशजी सपना म कयो कि म तो आपका खेत का बारा दान नाज का तोड़ लिया था, सो दोष उतार न खातर काम कर्यो थो I सेठजी क करोड़ों की माया होगी I हे गणेशजी महारज ! जिसो बी सेठ न दियो, बिसो सब न दियो I कहताँ न, सुनतां न, हुंकारा भरतां न आपना सारा परिवार न दियो I