बुधजी की कहानी

एक साहूकार क बेटा था I वा बुधवार न अपनी घरवाली न पीहर स ल्याण जाव थो, तो ऊँ की माँ कयो कि आज बुधवार न मतना जा, काल चल्यो जाय I पण वो मान्यो कोणी और चल्यो गयो I रास्ता म दो चोर चोरी कर क भाग था, वे तो भागगा, साहूकार क बेटा न पकड़ लियो और भोत मारयो I पिछ भी बिक आँख कोनी होई I सासर गयो,  न बोल्यो कि थारी बाई न भेजो I बुधवार को चल्यो जाऊँगा I सासू भोत समझाई बुधवार न ट ना जाओ, आग पिछ – चल्या जाओ I पर वो मान्यो कोनी और ब ठ बुधवार न चाल्यो I रास्ता म पांच बरस को बेटी थी जिकी खोगी I दो दिन ढूंढ कर हैरान होगा, तो कयो अब बुधवार न कदे भी कोनी जाऊं I पिछ बेटी    मिलगी I ऊँ दिन स बुधवार न कोनी जा न को प्रण कर लियो I सारी नगरी म हेलो फिरा दियो कि कोई भी बुधवार न दूसर गाँव मत ना जाइए I