चंदा – लक्ष्मी की कहानी

एक गरीब साहूकार साहूकारनी थी I साहूकारनी को नाम चंदा थो I चंदा भोत दलिद्दरपन स रहती I सब स झगड़ो करती, फाट्या कपड़ा, फूटे बर्तन, टूटी खाट, गंदा टाबर राखती I इस वजह स ईको पति भी भोत नाराज रहतो I पर चंदा रोज लक्ष्मीजी विष्णुजी की पूजा किया करती I एक दिन लक्ष्मीजी न दया आगी I अँधेरी रात थी, चंदा हाथ म दीयो लियां गली म जाव थी I रास्ता म लक्ष्मीजी आया और बोल्या कि बाई ठहरजा, मन भी दीयो को चानणों दिखा दे I दीया क चानणा म दोनूं जना बात करती जाव लागी I लक्ष्मीजी बोल्या कि आपां दोनूं जना भायली बन जावां I चंदा बोली कि अच्छा बन जावांगा और दोनूं भायली बानगी I लक्ष्मीजी चंदा क गयी, देख तो घर म दलिद्दर छारयो है I जद लक्ष्मीजी चंदा न कयो कि घर की या के दसा कर राखी है I आओ आपां दोनू जना काम करां I चंदा बोली कि मन तो काम करनो कोनी आव, तू बताती जा तो म बैयाँ कर लूंगी I लक्ष्मीजी बता कर झाड़ू दिवाई, चौको दियो, माचा कसाया, नया बर्तन, नया कपड़ा मंगाया, टाबरां क तेल – उबटन कराया, नया कपड़ा – गहना पहराया, रसोई कर क भायली न जिमाई I अइयां ही लक्ष्मीजी कई बार आकर बिन काम करनो सिखाती I पिछ धीरे – धीरे चंदा आप ही करन लागगी I उस ऊक भोत धन हो गयो और उको धणी भी राजी रहन लागगो I चंदा सोचती कि मन तो भोत अच्छी भायली मिलगी, इतनो सुख होगो I इतनो सब देखकर चंदा की दोर – जिठानी – पड़ोसन पूछन लागगी कि तेर इतनो धन कइयां होगो I चंदा बोली कि लक्ष्मीजी मेरी भायली है, बा ही मन दियो है I अब सब जनां बोलन लागगी कि भायली होगी तो के है, वा तो अइयां ही फिरती – फिरती फिर है, तेर किसी पीढो घाल कर थोड़ी बैठगी I चंदा न ज्ञान होगो I दूसर दिन लक्ष्मीजी आई, जद चंदा पीढो बिछा दियो और बोली कि मेरा पीढ़ा पर बैठजा I लक्ष्मीजी बोली कि पीढ़ा पर तो मैं राजा – राणी क ही कोनी बैठूं I चंदा कहन लागगी कि मेर तो बैठनो ही पड़सी I लक्ष्मीजी बैठगी I जना चंदा बोली कि म जाकर आऊं हूँ, आऊं नहीं जब तक जाय मतना और आपका पीहर चली गयी I चंदा पाछी आई कोनी, लक्ष्मीजी गई कोनी I साहूकार क करोड़ रुपिया कि माया होगी I हे लक्ष्मी माता ! जइयां बी साहूकारनी न धन संपत्ति देई, अइयां ही म्हान भी दिये, सब न दिए I कहता न, सुनता न, हुन्कारां भरतां न, आपना सारा परिवार न दिए I