गाज का उजमन

Date: 19 Sep 2021

भादुवा सुदी चौदस को ” गाज का उजमन ” करते हैं । जिस साल लड़का होता है या लड़का का विवाह होता है, उस साल लड़के की माँ अच्छा दिन देख कर उजमन करती है । इस दिन व्रत करते हैं, और कहानी सुनते हैं । कहानी नीचे लिखी हुई है I

एक जल के लोटे पर सथिया करो । 7 गेहूँ का दाना हाथ में लेकर कहानी सुनो । फिर सात जगह चार पूड़ी, थोड़ा सीरा, ओढ़ना, साड़ी और रुपिया पर हाथ फेर कर सासुजी को पैर छूकर दे दो । जल के लोटे से सूरज भगवान को अरग दो । सात ब्राह्मनियाँ को भोजन कराओ, सीरा-पूड़ी (जिसमे हाथ फेरा है) भी दे दो । दक्षिणा दो । फिर आप भी भोजन कर लो ।

गाज की कहानी

एक राजा थो, एक रानी थी । दोनूं जना महल म सुत्वा था जिकी गाज माता भोत जोर स गाजी, तो रानी बोली की हे गाज माता अगर म न्हाई रह जाऊँ, तो तेरी सीरा की कढ़ाई कर देऊँ । पिछ रानी न्हाई रहगी । थोडा दिन बाद रानी बोली कि हे गाज माता मेर बेटो हो जाव, तो म दो सीर की कढ़ाई करूँ । रानी क लड़को भी होगा, पर वा कढ़ाई करी कोनी । गाज माता सोची की या तो आपा न भूलगी, सो एक दिन गाजती-घोरती आई और पालना सुदां लड़का को उठा कर लेगी । एक भील-भीलनी थी, जीना क घरा पालनो ले जाकर रख दियो । वो भोत गरीब था और ऊँना क बच्चा भी कोणी था । दोनूं जना जंगल म गयेड़ा था । आकर लड़का न देख्या, तो भोत राजी होया और ऊ न खिला न लाग्या । एक धोबी थो, जिको राजा का और भील का कपड़ा धोतो । बठी न राजा क घर म रोल्यो हो रयो थो कि गाज माता लड़का न उठा कर लेगी, तब धोबी बोल्यो – एक लड़को पालना म भील क घरां सुत्यो है । भील बोल्यो कि म्ह गाज माता को व्रत करता, म्हान तो वा ही दियो है । जद रानी की याद आयो कि म भी दो सीर की कढ़ाई बोली थी, पर करी कोनी । जिक सही म्हारो बेटो चल्यो गयो । रानी बोली कि हे गाज माता ! म्हारो बेटो पाछो ल्यादे, म्हे जितनी कढ़ाई बोल्यां हां, ऊ स दूनी करांगा । रानी न गाज माता को खूब धूम-धाम स उजमन करयो । गाज माता लड़का न पाछो ल्यादियो । पाछे भीलनी क भी धन-लड़को हो गयो । राजा सारी नगरी म हेलो फिरा दियो कि सब कोई जाये-ब्याहे को गाज माता को उजमन करियो । हे गाज माता ! जिसो रानी न, भीलनी न लड़को-धन दियो बिसो सब न देईयो । कहतां न, सुणतां न, हुंकारा भरतां न, आपना सारा परिवार न देईयो ।
इसके क बाद बिन्दायाकजी की कहानी सुनो ।

बिन्दायकजी की कहानी

एक विधवा मालन थी, ऊं क एक चार बरस को भोत सुन्दर लड़को थो I मालन की सासू ऊ न भोत दुःख देती I एक दिन सासू न दोनू जना न घर स निकाल दी I दोनू जना उठ स चल्या गया I चालता – चालता दूर जाकर एक गाछ क नीच बैठगा I गाछ क सामन बिन्दायाकजी को मंदिर थो I दुनिया दर्शन कर न आती जिकी उनां न प्रसाद बाँट जाती , जिक स ऊना को पेट भर जातो I दोनु जना बठ ही रहन लागगा और बिन्दायाकजी को भोत सेवा – पूजा करन लागगा I एक दिन मालन सोची कि आपां जंगल स फूल ल्याकर, पूजा की सामग्री और प्रसाद बेचां तो आपन भोत पीसा आन लाग जासी ब लोग दुकान खोल ली I खूब बिक्री होन लागी I पीछ बी बिक्री कर न ताई आदमी राख लियो और आप बिन्दायकजी की सेवा – पूजा कर न लागगी I धीर धीर कमाई हों लागगी  तो मकान करा लियो I मुनीम – गुमास्ता राख कर और बड़ी दुकान खोल ली I लड़का न पढ़ न भेजन लागगी I लड़को पढ़ न जातो बठ राजा की लड़की भी जाती, ऊँ स भोत दोस्ती होगी I लड़को राजा क घरां भी जान लागगो जिकी बी लड़का न इतनो सुन्दर देखकर आपनी भाभियाँ न बोली कि म तो इस स ब्याह करुँगी I भाभियाँ आप क सासु – सुसरा न जाकर सारी बात बताई I राजा बोल्यो कि ठीक है अगर प्रतिज्ञा कर ली है तो आपां न करनो पड़सी I खूब धूम – धाम स लड़की को ब्याह कियो, भोत दायजो दियो I मालन भोत राजी होई I बेटा – बहू न आटा देखकर पहले बिन्दायकजी क मंदिर म धोक दिवाई, पिछ घरां ल्याई I सारा गाँव म ढिंढोरा पिटवायो कि बिन्दायकजी की सेवा -पूजा करन स दुखी आदमी भी सुखी हो जाव I या सुनकर और दुनिया दर्शन करन आन लागगी I बेटो काम सम्भालन लागगो I मालन और भी सेवा – पूजन करन लागगी I बठी सासु के अन्नदाता बैर पड़गो, जिको रूलता – रूलता एक दिन अठ आगा I आकर लड़का न बोली कि म न नौकरी राख ले, खाली रोटी – कपड़ा दे दिए I म सारो काम कर दूंगी I लड़को राख लियो I दोनूं एक दूसरा न पहचान्या कोनी I मालन थोड़ी देर म पूजा कर क आई, देख तो सासू काम कर है I सासू न पूछी थे अठ काम कैयां करो हो I सासू बोली कि अठ को सेठ मन नौकरी राखी है I जद बहू बोली कि सासुजी यो तो थारो ही पोतो है, या बहू है, यो आपनो ही मकान है I थे तो म्हा न काड़ दिया था, पर बिन्दायकजी म्हारी लाज राखी है I सासू भोत शर्मिन्दा होई I बोली कि मेरी करनी म भोग लेई I बहू बोली सासूजी अब थे अठ ही रहो, पोता का सुख देखो I सासू बठ ही रहन लागगी I हे बिन्दायकजी महाराज ! जिसो मालन न धन दियो बिसो सब न दियो I कहतां न सुणतां न, आपणां सब परिवार न दियो I