गोवरधन बधावा

(Jukebox For All Geet Written Below)

1) आमुजी पाक्या

आमुजी पाक्या नीम्बू बूफण लाग्या, दाल रही असराल । सखीरी नीम्बू बूफण लाग्या ।
ढोलो मारुणी दोनू बातांजी लाग्या, थार पीहरिय म प्यारो कुण । सखीरी नीम्बू……
एक पियारा म्हारा बापूजी लाग्या, दूजी म्हारी राता देई माँय । सखीरी नीम्बू……
एक पियारा म्हारा बीरोजी लाग्या, दूजी म्हारी राई सी भौजाई । सखीरी नीम्बू……
ईनर बाता स मरवण खारा भी लागो, देस्यां थान पीहरिये पहुँचाय । सखीरी नीम्बू……
आमुजी पाक्या नीम्बू बूफण लाग्या, दाल रही असराल । सखीरी नीम्बू……
डोली मारुणी दोनूं बातां जो लाग्या, धार सासरिय म प्यारो कुण । सखीरी नीम्बू……
एक पियारा म्हारा सुसरोजी लाग, दूजी म्हारी सास सतती । सखीरी नीम्बू……
एक पियारा म्हारा जेठजी लाग, दूजी म्हारी लाल जिठानी । सखीरी नीम्बू……
एक पियारा म्हारा देवर लाग, दूजी म्हारी छोटी सी दोराणी । सखीरी नीम्बू……
एक पियारा म्हारा कंवरजी लाग, पगांए पड़नती कुल बहू । सखीरी नीम्बू……
एक पियरी म्हारी घीयड़ा लाग, दूजा म्हारा लाड़ जवांई । सखीरी नीम्बू……
एक पियारा म्हारा बाईजी लाग, दूजो म्हारो बाईजी रो बीरो । सखीरी नीम्बू……
इनर बातां स मरगा प्यारा भी लागो, बेरया थाक हीराक हार घड़ाए । सखीरी नीम्बू……
देरयाँ थान सरब सुहाग । सखीरी नीम्बू……

2) बधावो जी राज

बधावो जी राज बधावो, बधावो म्हार घर आयो ।
बधावो जी बेटा जायां, बधावो बहू घर आयां ।
सीयाल की रूत आई, चत्तरसाला म सेज बिछाई ।
चत्तरसाला म सेज बिछाई, मृगानैणी पोड़ण आई ।
चंद्राबदनी पोड़ण आई, लसकरिये कंठ लगाई ।
मन भरिये कंठ लगाई, मोहरां स पस ए भराई ।
लड़वां स गोद भराई, थे तो बांटो साजनियारी जाई ।
थे तो बांटो साजनियारो जाई, थारी दुनिया म होवगी बड़ाई ।
बधावो जी राज बधावो, बधावो म्हार घर आयो ।
बधावो जी बेटा जाया, बधावो बहू घर आया ।
उन्द्याल की रूत आई, झोरोखां सेज बिछाई ।
झिरोकां सेज बिछाई, मृगानैणी पोड़ण आई ।
चंद्राबदनी पोड़ण आई, लसकरिये कंठ लगाई ।
मन भरिये कंठ लगाई, मोहरां स पस ए भराई ।
लड़वां स गोद भराई, थे तो बांटो साजनियारी जाई ।
थे तो बांटो साजनियारो जाई, थारी दुनिया म होवगी बड़ाई ।
बधावो जी राज बधावो, बधावो म्हार घर आयो ।
बधावो जी बेटा जाया, बधावो बहू घर आया ।
चोमास की रूत आई, बँगला म सेज बिछाई ।
बँगला म सेज बिछाई, मृगानैणी पोड़ण आई ।
चंद्राबदनी पोड़ण आई, लसकरिये कंठ लगाई ।
मन भरिये कंठ लगाई, मोहरां स पस ए भराई ।
लड़वां स गोद भराई, थे तो बांटो साजनियारी जाई ।
थे तो बांटो साजनियारो जाई, थारी दुनिया म होवगी बड़ाई ।

3)  बहू महलां स
बहू महलां स रिम झिम उतरी, बहू कर सोलह श्रींगार । आज म्हारी असली फल लीजो ।।
म्हारी सासुजी पूछए बहू, थार गहणा को अरथ बताव । आज म्हारी…… ।।
सासुजी गहणा गहणा के करो, सासु गहणा म्हारा द्वार जेठ । आज म्हारी…… ।।
म्हारो सुसरो गढ़ा को राजा जी, सासुजी म्हारा अरथ भण्डार । आज म्हारी…… ।।
म्हारा जेठ बाजूबंद बांनरा, जिठानी म्हारी बाजूबंद री लूम । आज म्हारी…… ।।
म्हारा देवर चुडलो दांत को, दोराणी म्हारी चुडलारो टीप । आज म्हारी…… ।।
म्हारी ननद कसुमल कांचवो, ननदोई गज मोतिडारो हार । आज म्हारी…… ।।
म्हारा कंवरजी मोती बांटला, कुल बहू म्हार मोर्यो चिवली लाल । आज म्हारी…… ।।
म्हारी धीएड चली पान की, जंवाई म्हारा चम्पारा फूल । आज म्हारी…… ।।
म्हारो सांएव सिर को सेवरो, साएवाणी म्हार सेजा-श्रृंगार । आज म्हारी…… ।।
सासु इतना जी गहण मोकल, केसरियो म्हार तिलक लिलाट । आज म्हारी…… ।।
म्हे तो वार्या जी बहू ए थारी जीवण, लड़ायो म्हारो सारो परिवार । आज म्हारी…… ।।
म्हे तो वार्या जी सासुजी थारी कूखन, थे तो जाया जाया अर्जुन भीम । आज म्हारी…… ।।
म्हे तो वार्या जी सासुजी थारी कूखन, थे तो जाया भोली बाईजी रो बीर । आज म्हारी…… ।।
म्हे तो वार्या जी बाई जी थारी, गोद न खिलाया कमधजिया स बीर । आज म्हारी…… ।।
म्हार आँगण करवा झांकिया, घर आया साहजी दसरथजी रा पूत । आज म्हारी…… ।।
म्हार आँगण करवा झांकिया, घर आया कंवर रामचन्द्रजीस पूत । आज म्हारी…… ।।
म्हार पीहरिया की बाटल्या, म्हे तो बायो बायो जिनवारोबाग । आज म्हारी…… ।।
ब तो धोया जी चावल उजला, उजलायत म्हारी माँ को बीर । आज म्हारी…… ।।
म्हारी सासरियां की बाटल्या, म्हेतो बायो बायो निम्बुवां को बाग । आज म्हारी…… ।।
ब तो हरिया जी नीम्बू रस भर्या, रसभरिया भोली बाईजीरो वीर । आज म्हारी…… ।।

4)  सुणोजी भंवर
सुणो जी भंवर म्हान सुपनोसो आयो जी राज, सुपना रो अर्थ बतोवो जी राज ।
कहो ए गोरी थान के बिद आयो जी राज, सूपना को अर्थ बतायां जी राज ।
हंस सरवर डोला गावत देख्या जी राज, मानसड़ा दोए जल भर राज ।
बागां माली चंपा म्हे फूलत देख्या जी राज, फूल बीण दोए कामणी राज ।
पोली माल्या हंसली म्हे हांसत देख्या जी राज, हरी-हरी दूब घोड़ा चर राज ।
आंगनियो रो चोक म्हे पूरत देख्या जी राज, ऊपर कुम्भ कलस धर्यो राज ।
महला मालो दिवलो म्हे जगतो सो देख्या जी राज, दिवला री जोत सवाई जी राज ।
हंस सरवर गोरी पीहर तुम्हारो जी राज, मानसड़ा थारो सासरो राज ।
बागां माली चंपा ब बीर तुम्हारा जी राज, हरी-हरी दूब सवासणी राज ।
आंगणियारो चोक व कंवर तुम्हारा जी राज, कुम्भ कलस थारी कुल बहू राज ।
महलां मालो दिवलो व कंथ तुम्हारो जी राज, दिवालां री जोत साएबाणी जी राज ।
धन धन जी दशरथजी रा छावा जी राज, सुपनारो अर्थ भलो दियो राज ।
धन धन जी रामचन्द्रजी रा छावा जी राज, सुपना रो अर्थ भलो दियो राज ।
धन धन ए साजनियारी जाई जी राज, वंश बढ़ायो म्हार बाप को जी राज ।
रूपा को रुड़ी सुहागां की पूरीज राज, पूत जण म्हारो घर भर राज ।

6)  म्हार आंगण
म्हार आंगण आम पिछोकड़ मरवो, यो घर सदा ए सुहावणी ।
तू तो चाल लक्ष्मी जां घर चालां, जां घर रलिए बधावणा ।
जठ बड़ा नर बड़ाई देस्यां, दुणो सो मान बढ़ायस्या ।
जद कुल बहुवां न आदर देस्यां, सास नणद गुण मान्स्यां ।
म्हार गाय गवाड़ भैंस बाड़, सोहन थम्ब बिलोवणो ।
विलोवणो म्हारो घर धाम क, आंगण झबक कुल बहू ।
संसार को सुख आज देख्यो, पूत परण घर आइया ।
म्हार पूत-कारण बहू ए प्यारी, पूत कुल को दीवलो ।
म्हारी सास सपूती क सरवर रहस्यां, दहेज क गुण आग ल ।
म्हारी दोर जिठानी बराबर रहस्यां, काम क गुण आग ल ।
म्हारी सहिइ सहेल्या स सरवर रहस्यां, रूप क गुण आग ल ।
म्हार सगण साहेब क म्हे मन स रहस्यां, कूखा क गुण आग ल रूप क गुण आग ल ।
इसड़ो बधावो साएबा जाण न देस्यां, घणाए दिना स आयो पावणो ।
एक लख देता साएबा दो लख देस्यां, नैन काजल जूं म्हे बरतरयां ।
इसड़ो बधावो लिख पीहर भेजां, भाभी मेड़तणी क जायो गीगलो ।
चीतरे स आंगण म्हारी नणद ऊबी, द्यो म्हारा बाईजी आसीसड़ी ।
बीरा फल जोर फूलजो नीम की डाली, बधजोर माली दूब जूं ।
भाभी सात ए थे पूत जण जो, एक जण जी धीयड़ी ।
थारी धीयड़ न परदेस दीज्यो, जूं चित आव रूड़ी नणदली ।
म्हारी भावज की भावज धीय जणजो, जूंगत जाण सासु नणदकी ।

7)  झिर-मिर
झिर मिर झिर मिर साएवा मेघो जी बरस, ओजी नानीसी बूँद सुहावणी जी ।
इन बूंदा स म्हारो तन सुख भीज, ओजी और रंगद्यो बाला चुनड़ी जी ।
ये आंगणिये सएवा कांच ढूलाद्यो, ओजी बगड़ ढलायो जाजा हींगलू जी ।
ये आंगणिये गोरी कुण वीर गो, ओजी थारो तो पीहर गोरी दूर बसजी ।
ये आंगणिये म्हारो सुसरो फिरगो, ओजी सदाए सुरंगी म्हारी सासुजी ।
ये आंगणिये देवर जेठ फिरगा, ओजी दोर-जिठानियाँ रो आजा झूमखो जी ।
ये आंगणिये म्हारी नणद फिरगी, ओजी नित र नणदोई प्यारा पावणा जी ।
ये आंगणिये म्हारा कंवर फिरगा, ओजी पगाए पड़न्ती म्हारी कुल बहूजी ।
ये आंगणिये म्हारी धीया फिरगी, ओजी लाड़ जंवाई प्यारा पावणा जी ।
ये आंगणिये साएबा आप फिरोगा, ओजी कंवर खिलाता राजीड़ारी धण जीर जी ।
इनको बधावो साएबा जाण न देस्यां, ओणी घणा ए दिना स आयो पावणो जी ।
एक लख देता साएबा दो लख देस्यां, ओजी घणा ए दिना स आयो पावणो जी ।
इसड़ो बधावो म्हार पीहर भेजां, ओजी भाभी मेड़तणी क जायो गोगलो जी ।
इसड़ो बधाओ म्हारी मेई म राखां, ओजी नैन काजल जूं म्हे बरतस्यां जी ।
इसड़ो बधावो म्हारी सेजां स राखां, ओजी किरोड़ारी माया म्हार बर हुई जी ।

8)  पोलीड़ा पोल
पोलीड़ा पोल उधाड़ जी, म्हान अन्दर भीतर जाणद्यो जी ।
जठ सुसराजी रोज जी, म्हार सुगण साएब की सएबी जी ।
हंसतीरा झूम छबार जी, म्हार बद्या तेजी जो चार जी ।
ब्राह्मण को करए रसोई जी, म्हार सोहन लक्ष्मी बोधणी जी ।
सोनो घड़ाए सुनार जी, म्हार गैणा का डब्बा भर्या जी । मनाय बधवो म्हार चित्तये बधावो……
म्हार सर्वसुख भर्या ए आनंदजी, म्हार घर म लक्ष्मी बोधणी जी ।
इब क जणागां म्हे धीय जी, म्हे तो कराए साजनियां स विनती जी ।
मुलकत आवणी बरात जो, म्हार झबकत आव रूड़ा साजना जी । मनाय बधवो म्हार चित्तये बधावो……
सर्वसुख भयो ए आनंदजी, म्हारी धीय जंवाई ले गयो जी ।
इब क जणागां म्हे पूत जी, म्हे तो कराए साजनियां स गोठड़ी जी ।
मुलकत चढ़गो बारात जी, म्हार पगां ए पड़न्ती आव कुल बहू जी । मनाय बधवो म्हार चित्तये बधावो……
सर्वसुख भयो ए आनंदजी, म्हारो पूत परण घर अइयो जी ।
सर्वसुख भयो ए आनंदजी, म्हारो भवड़ जायो गोगलो जी ।