जाटक भाटक की कहानी

एक जाटको थो, एक भाटको थो I जाटको चाल्यो सासर, भाटको चाल्यो भैण क I रास्ता म कूँवा की पाल पर दोनूं जणा बैठ्या I जाटको बोल्या कि आ भायला आपां नगर बसेरो करां I भाटको बोल्या कि म तो मेरी भैण न लें जाऊं हूँ, जिको लेकर आ जाऊँगा I तू मेरा सासर जाव है, लाड़ – चाव करान म देरी हो जासी, सो तू ही कर I जाटको कूँवा की पाल पर बैठ कर पानी की घंटी और चावल का दाना लेकर नगर बसेरो करन लाग्यो और बोल्यो – नगर बसेरो से कर, से नर धोव पाँव – ताता मांडा तापसी देसी म्हारी मांय – मांय न देसी मान्वसी – देसी द्वारका का नाथ I भाटको तो आपकी भैण क चाल्यो गयो थो, जाटको आपक सासर चल्यो गयो I जाटका का सासर म सब कोई खूब लाड़ – चाव करया I भाटको आपकी भैण क गया तो जाता ही ऊँ क मकान म आग लागगी I आग बुझाता – बुझाता, राख उठातां उठातां ऊँ कि टाट गंजी होगी I संजा न दोनूं जणा ओजूं कुँवा की पाल पर मिल्या I जाट को पूछ्यो कि भायला के खबर है I भाटको बोल्या कि मेर तो जाता ही, भैण क मकान म आग लागगी, टाट भी गंजी होगी और कुछ खाने भी कोनी मिल्यो I जाटको बोल्यो कि म तब पहले ही बोल्यो थो कि नगर बसेरो कर ले I भाटको बोल्या कि भई तेर नगर बसेरा म इतनो गुण है, तो अब कर लेवां I दोनू जणा हाथ म घंटी और चावल का दाना लेकर नगर बसेरो कर लियो I भाटको ओजूं भैण क अठ गयो I भैण की पड़ोसन बोली कि तेर भाई न आया दो दिन होगा, रोटी – पानी कोणी खायो अगर तेर पास कोनी ह तो मेर पास स उधार ले ले I भैण पड़ोसन क कन स ल्याकर भाई न जिमायो I अठी भाटको आप की भैण न लेकर चाल्यो, बठी न जाटको आपकी लुगाई न लेकर चाल्यो I दोनूं जणा ओजूं कुँवा की पाल पर मिल्या I जाटको ओजूं बोल्या कि आ भायला नगर बसेरा करां I भाटको बोल्यो कि मेर तो माँ है, जिको म न डीकती होसी, जातां ही दही – चूरमो खान मिल जासी I तू ही नगर बसेरो कर, तेर तो मांवसी है, त न रोटी घालगी की नहीं I जाटको नगर – बसेरो कर क घरां गयो I जाता ही मांवसी भोत लाड़ – चाव करया I अठीन भाटको घरां गयो तो ऊँ की भैंस खोगी I बाप ऊन खूब मारन लाग्यो, बोल्यो कि भैण क गयो तो आग लगादी, ऊर आयो तो भैंस खोदी I पहले भैंस खोज कर ल्या, जद रोटी – पानी खान मिलसी I सारो दिन होगो ढूँढता ढूँढता, पर भैंस कोणी मिली I बाजार म ओजूं दोनूं भायला मिलगा, जद भाटको पूछ्यो कि भायल के खबर है I भाटको बोल्यो कि आतां ही मेर बाप कि भैंस खोगी, दिन भर स ढूंढू हूँ, रोटियाँ को ही ठिकानों कोणी Iजाटको बोल्यो म तन पहले ही बोल्यो थो कि नगर बसेरो कर ले I भाटको बोल्यो कि तेर नगर बसेरा म इतनो गुण है, तो अब कर लेवां I दोनूं जणा नगर बसेरो कर लिया I आण लाग्यो तो रास्ता म भैंस मिलगी, लेकर घरां आयो I माँ बोली कि छोरा आतां ही काढ़ दियो, सारो दिन होगो भूखां मरता I पिछ ऊन खूब अच्छी तरह जिमायो I बो लोग सारी नगरी में हेलो फिर दिया कि सब कोई कातिक म पीहर – सासर आतां – जातां नगर बसेरा करिए I