
रक्षा बंधन
Date: 22 August 2021
श्रावण सुदी पूर्णिमा को ” रक्षा बंधन ” होता है । इसके दो दिन पहले गोबर के पानी से घर के सब दरवाजे के दोनो तरफ टिक्की दो । पूर्णिमा के पहले दिन टिक्की के ऊपर चूना लगाओ , गेरू से सूण बनाओ या फिर चिपकाओ ( बाजार में मिल जाता है ) । पूर्णिमा के दिन जिस समय भद्रा नही हो उसी समय सब सूण को जल का छींटा दो, रोली, चावल और मोली चढ़ाओ । लाडू से जिमाओ । इस दिन सुबह हनुमानजी, पीतरजी का धोक लो । जल, रोली, मोली, चावल, फूल, प्रसाद, नारियल, राखी, दक्षिणा चढ़ाओ । धुप-दीप करो । खीर-पूड़ी की रसोई बनाओ । घर में सबके भोजन हो जाने के बाद सबसे पहले राखी बाँधो । टीका निकालकर, राखी बाँध कर, नारियल दो, औरतों के पल्ला में गाठ और मेवा दो I जब बहन अपने भाई-भाभी को राखी बांधता है तब भाई, बहन को रुपिया देते हैं ।
इस दिन जिस आदमी ने जनेऊ लिया है, वो गंगाजी नदी या कुंआ पर जाकर, गऊमूत्र, गोबर, गंगाजी, गंगाजी की माटी, गोपीचंदन बदन में लगा कर नहाते हैं । फिर जनेऊ और सप्तरिषियों की पूजा करते हैं, कथा सुनते हैं । बाद में नई जनेऊ पहन लेते हैं । पंचगव्य लेते हैं ।