संक्रान्ति

Date: 14 January 2022

 पौष या माघ महिना में बड़ी ” संक्रान्ति ” आती है । इस दिन गंगाजी नहाते हैं । काला तिल का लड्डू, दाल-चावल मिला कर और घेवर दान करो । एक घेवर पर दाना का लड्डू, आटा गुड़ का लड्डू और रुपिया रख कर, बाना निकाल कर सासुजी को पैर छूकर दो । अपनी बहन-बेटियाँ को भी इसी तरह बाना और संक्रान्ति का नेग का लड्डू-घेवर भेजो । संक्रान्ति का तीन-सौ-आठ नेग होता है, जिसमे से जो आपका मन हो, वो नेग करो । कुछ नेग तो यहाँ लिखा है और बाकी का ब्राह्मण से पूछकर कर सकते हो । लड़की से ब्याह्वली साल ” घाट-पाट “, ” कोठी-मुट्ठी “, ” चिड़िया मुट्ठी “, का नेग कराते हैं । दूसरी साल इनका उजमन करा देते हैं । अगर ब्याह्वली साल की संक्रांति का भी उजमन कराते हो, तो लड्डू, घेवर, ओढ़ना, ब्लाउज और रुपिया पर बाना निकाल कर सासुजी को पैर छूकर दे दो ।

संक्रान्ति का सारा नेग 

घाट पाट

घाट पाट सीचना इस संक्रांति से शुरू करो । अपने घर के सामने थोड़ा गोबर रख कर, पहले जल का छींटा दो, रोली की सात टिक्की दो और चावल चढ़ाओ । फिर गोबर के आगे जल सींचती जाओ और बोलती जाओ – ‘सीचुंगी घाट पाट, पाऊँगी राज पाट’ । बारह महिना रोज ऐसे ही पूजा करो । अगर रोज नही हो सके तो हर महीना की संक्रान्ति के दिन, तीस दिन की एक साथ ही पूजा कर लो । साल भर पूरा होने के बाद बड़ी संक्रान्ति में इसका उजमन कर दो । उजमन में एक ओढ़नी, ब्लाउज, एक चांदी के लोटे में मेवा डाल कर और रुपिया पर बाना निकाल कर सासुजी को पैर छूकर दे दो ।

चिड़िया मुट्ठी

इस संक्रान्ति से अगली संक्रान्ति तक रोज एक मुट्ठी चावल चिड़िया को दो । रोज नहीं हो सक, तो हर महिना की संक्रान्ति के दिन तीस मुट्ठी एक साथ ही दे दो । दूसरी बड़ी संक्रान्ति के दिन इसका उजमन कर दो । उजमन में एक चाँदी की चिड़िया, चावल और रुपिया पर बाना निकालकर सासुजी को पैर छूकर दे दो । इस दिन संक्रान्ति से अगली संक्रान्ति तक रोज एक मुट्ठी चावल एक बर्तन में डालती जाओ । बर्तन भर जाए तो  चावल ब्राह्मण को देती जाओ । दूसरी बड़ी संक्रान्ति में इसका उजमन कर दो  । उजमन में एक टोपिया में चावल और रुपिया पर बाना निकालकर सासुजी को पैर छूकर दे दो ।

भगवान का पट खोलो

मन्दिर में एक परदा और मिठाई-रुपया ले जाओ । पहले परदा लगवा दो, फिर उसे खुलवा कर मिठाई का भोग लगाओ, रुपिया चढ़ाव, खुलाने का भजन गाओ ।

सोते ससुर को जगाओ

ससुरजी पलंग पर सो जाते हैं । तब बहू पलंग का चारों पागान नारियल से खुड़काती है । ससुर जी उठ कर बैठ जाते हैं । बहू उनके सामने लाडू, घेवर और रुपिया रखती है । सासुजी के पैर छूकर रुपिया दो । ससुरजी बहू को गहना-रुपिया देते हैं । ससुर जगाने का गीत गाओ । अगर पीहर से औरतें आई हैं तो,  ससुरजी को देने का लाडू, घेवर और रुपिया वो लाती हैं। सगियों को मिलाई देती हैं । जवाई का तिलक करतीं हैं । सासुजी सगियां की वारी फेरी करती हैं । गीत गाने वाली मिसरानियां को रुपिया देती हैं ।

थाल परोसो

दादसरा जी, ससुरजी, तायसराजी, पीतसराजी, जेठजी, नानसराजी, मामसराजी किसी  का भी थाल परोसो । थाल में मिठाई भी परोसो । फिर वो बहू को गहना-रुपिया देते हैं ।

सासुजी के सारे नेग

  • सासुजी को साड़ी पहनाकर, रुपिया देकर पैर छूओ ।
  • सासुजी को सीढ़ियाँ चढ़ाओ, सासुजी जब सीढ़ी चढ़ती हैं, तब बहू हर सीढ़ी पर रुपिया रखती जाती है और सासुजी उठाती जाती हैं । फिर सासुजी के पैर छूकर  रुपिया और दे देती है 
  • बहू सासुजी को माठी पर रुपिया रख कर देती है और बोलती है- ‘लेओ सासुजी माठी, दिखाओ थारी गाठी ‘ । सासुजी अलमारी में से बहु को गहना-रुपिया देती है ।

जेठजी का भेंट

जेठजी के आगे एक थाली में मिठाई और रुपिया लेजा कर रखो । जिठानी को घेवर पर रुपिया देकर पैर छूओ ।

देवर को घेवर दो

देवर को घेवर के ऊपर रुपिया रख कर दो ।

आवल चावल खूंटी चीर

पहले नन्द को जिमाओ, चावल जरुर घालो । फिर खूंटी पर साड़ी-ब्लाउज टांग दो । भाभी नन्द को कहती है – “आवब चावल खूंटी चीर दिखाओ बाईजी थारो बीर” । नन्द कहती है – ‘जिम्या चावल ओडया चीर, देखो भाभी म्हारो बीर’ । ये बात कह कर अपने भाई को दिखा देती है । भाभी नन्द क पैर छूकर रुपिया देती है और
खूंटी पर टंगा हुआ साड़ी-ब्लाउज देती है ।

ननद की पर्स भरो

नन्द का हाथ रुपिया से भरकर भाभी बोलती है – ” भर पस ननद हँस “।

नणदोई का झाला भरो

नणदोई का कपड़ा, दुशाला या दुपट्टा, लड्डू, मेवा, घेवर, एक नारियल, रुपिया और अपने परिवार को लेकर नणदोई के घर गीत गाते हुए झोला भरने के लिए जाते हैं । नणदोई को दुशाला या दुपट्टा उढ़ा कर, मेवा से पल्ला भर कर रुपिया, नारियल देकर टिका काढ़ते हैं। ननद को रुपिया देकर पैर छूते हैं । सबको मिलाई देते हैं । नणदोई की माँ सबकी वारी फेरी करती है, मिसरानियाँ को रुपिया देती है ।

जेठूता को जलेबी दो

चार जलेबी पर कटोरी में दही और रुपिया जेठूता को देकर बोलते हैं – “चार जलेबी ऊपर धई, जेठ क बेटो चची कही” ।

गोजिया भरो

कुंवारी नणदों या जेठूतियां या भांजियां के लिए गोजिया भरो । उनको कपड़ा दो, मेवा से पल्ला भरो ।

पति का नेग

आधा नारियल में दाख भर ऊपर रुपिया रख कर पति को देते हैं और बोलते हैं- ‘बेलो भरयो दाखां को, सांई पायो लाखां को’ । चार जलेबी, पान और रुपिया दो ।

दोघड़ लाओ

लड़का हो उस  साल संक्रान्ति पे अपने पीहर से या बहन-सहेली के यहाँ से दोघड़ लाते हैं । एक माटी के घड़ा में जल भर के, उसके ऊपर चांदी का लोटा में जल भर के उसके ऊपर कपड़ा-रुपिया रखकर सथिया करो । पल्ला में मेवा और हाथ में चांदी की घंटी में सूत लपेट कर, एक चाबी डालकर, साथ दोघड़ लेकर ससुराल जापा का गीत गाते हुए जाते हैं । ससुराल जाकर दोघड़ की पूजा करके, घड़ा तो पैंडा में  रख देते हैं और चांदी का लोटा, कपड़ा, रुपिया सासुजी को पैर छूकर दे देते हैं । पीहर  की औरतें साथ जाती हैं, तो सगियों को मिलाई देती हैं, जवाई के तिलक करती हैं, बहन के बच्चों को रुपिया देती हैं ।

ब्राह्मण का नेग

१. एक पतीली में धई-रुपिया, झेरना और रस्सी दो ।
२. तेरह छाजला में गेहूँ, साड़ी, ब्लाउज और रुपिया पर हाथ फेरकर दो ।
३. ब्राह्मणी के सिर में तेल लगाकर तेल, कंघा, दर्पण और मांगटीका दो ।
४. ब्राह्मणी के मेहँदी लगवा कर अंगूठी दो ।
५. ब्राह्मणी को नुहा कर, कपड़ा, बाल्टी, लोटा और रुपिया दो ।
६. तेरह बॉक्स दो, एक-एक में आदमी का, औरत का, बच्चे का कपड़ा, गहना, बर्तन, सुहाग का समान, गीताजी, माला और रुपिया रखकर दो ।
७. ब्राह्मणी को बारह महिना तक भोजन कराकर , कपड़ा और रुपिया दो ।
८. तेरह टोपिया में गेहूँ और रुपिया दो । एक चक्की दो ।
९. तेरह डब्बों में  आंगी, सुहाग का  समान और रुपिया रख कर दो ।
१०. ब्राह्मण को भोजन खिलाओ ।