
सतियाँ की अमावस
Date: 7 Sep 2021
भादव की अमावस को ” सतियाँ की अमावस ” होती है । इस दिन पाटा पर जल का चोका देकर, तेरह रोली की टिक्की, तेरह मेहँदी की टिक्की, तेरह काजल की टिक्की दो I तेरह चिटकी, तेरह मीठी चिल्ली, दो मीठा घुघरा का पूड़ा, एक जोड़ी नाल, प्रसाद, और दक्षिणा चढ़ाओ । धुप-दीप करो । राणी सतीजी के मंदिर में भी जाकर, जल, रोली, मेहँदी, काजल, मोली, चावल, फूल, पूड़ा, प्रसाद, नाल, चूड़ी, सिन्दूर, नारियल से पूजा करो और दक्षिणा चढ़ाओ ।
राणी सतीजी की प्रार्थना
कर दो भक्तों का दुःख दूर, हे माँ सती राणी ।
कर दो हमारा दुःख दूर, हे माँ सती राणी ।।
गंगा जल चढ़ाऊं मैया, सविया करूँ ।
अक्षत चढ़ाऊं भरपूर, हे माँ सती राणी ।। कर दो ….
मोली चढ़ाऊं मैया, चुनड़ चढ़ाऊं ।
चूड़ला चढ़ाऊं भरपूर, हे माँ सती राणी ।। कर दो….
काजल चढ़ाऊं मैया, मेहँदी चढ़ाऊं ।
रोली चढ़ाऊं भरपूर, हे माँ सती राणी ।। कर दो….
पुष्प चढ़ाऊं मैया, दक्षिणा चढ़ाऊं ।
और चढ़ाऊं सिन्दूर, हे माँ सती राणी ।। कर दो….
श्रीफल चढ़ाऊं मैया, पेड़ा चढ़ाऊं ।
बरफी चढ़ाऊं भरपूर, हे माँ सती राणी । कर दो….
अगर जगाऊं मैया, दीपक जगाऊं ।
और जगाऊं कपूर, ही माँ सती राणी । कर दो….
चंपा दासी मैया, शरण आपकी ।
अरजी करो मंजूर, हे माँ सती राणी ।। कर दो….
कर दो भगतां का दुःख दूर, हे माँ सती राणी ।
कर दो हमारा बेड़ा पार, हे माँ सती राणी ।। कर दो….
राणी सतीजी की आरती
जय राणी सती माता, जय राणी सती माता ।
ध्यावत तुमको निशदिन, सुख संपत्ति पाटा ।। जय….
धुप, दीप, नैवेद्य, श्रीफल भेंट तेरी ल्याता ।
दया करो निज भक्त जानकर, तेरा गुण गाता ।। जय….
शहर झुंझुनू भवन बन्यो है, शोभित मंड साजे ।
भक्त खंड्या सेवा में हाजिर, नित नोबत बाजे ।। जय….
चन्दन, अक्षत, मोदक, भोग लागे पेड़ा ।
जो कोई ध्यावे, आनंद पावे, पार करे बेड़ा ।। जय….
बड़ा बाजार भवन बन्यो है, देखत मन मोहे ।
सुवर्णहार श्रृंगार गले विच शीश छत्र सोहे ।। जय….
चन्दन अगर कपूर की बाती, घृत दीपक जोवें ।
पूजा भक्त करे नितचित से, इच्छा फल होवे ।। जय….
कलकत्ता में आय पूजी तूं, भक्तन मनमानी ।
इच्छा पूरण करती, माता सती राणी ।। जय….
पति आप के मैया, रण में जूझ पड़े ।
सती हो गई संग पति के, स्वर्गवास करे ।। जय….
जय जयकार हो रही मैया, सेवक ध्यान धरे ।
शहर झुंझुनू भवन बन्यो है, निशदिन वास करे ।। जय….
कलकत्ते में प्रगट भई, तू भक्तन मनमानी ।
सब जाती मनावे, माता सती राणी ।। जय….
बड़ा बाजार प्रगट भई है, यात्री सब आये ।
अन्न धन देती मैया सबको, बाँझ पुत्र पावे ।। जय….
द्वारे ध्वजा फहराए मैया, नित नोबत बाजे ।
ब्राह्मण वेड उचारत, शीश छत्र साजे ।। जय….
मंगसिर बड़ी नवमी का, मेला होता भारी ।
रोली, मोली, श्रीफल, भेंट चढ़े थारी ।। जय….
लड्डू बुंदिया भोग लगत है, प्रसाद सभी पावे ।
घंटा शंख बजत है निशदिन, विप्र वेद गावे ।। जय….
राणी सती मैया की आरती, जो कोई नर गावे ।
इच्छा पूरण होवे, सुख संपत्ति पावे ।। जय….