सत्य भगवान का व्रत
हर पूर्णिमा को सत्य भगवान का व्रत होता है I शालिग्रामजी की पूजा करके, भोग लगा के, कथा सुनो I अगर घर में पूजा नहीं कर सकते, तो और कहीं से प्रसाद ले आओ I प्रसाद लेकर एक समय खाओ I व्रत करते हुए बहुत साल हो जाय तो पंडितों से पूछ कर उजमन कर दो I
सत्य भगवान की कहानी
एक दादी – पोती थी I जिक न सत्य भगवान की कहानी सुन न को नेम थो I एक कलसा म जल भर कर फूल रख कर कहानी कया करती I सत्य भगवान को नाम लेकर अरग दिया करती I पिछ एक दिन पोती सासर जान लागी, जद बिन सिर्फ एक कलसा म जल भर कर और फूल रखकर दे दिया और कुछ भी कोनी दियो और कयो कि कहानी क नेम कदे भी मतना छोड़ियो I बाई चाली और रास्ता जाती जाव, पछताती जाव कि सासर म सब कोई पूछगा कि के ल्याई है, तो म के बताऊंगी I जद सत्य भगवान सोच्या कि ई को संकट मेटना चाहिए I बाई रास्ता म कहानी कर क अरग देन लागी, तो हीरा मोतियां क गैणा का कुढ़ा होगा I उठ स खूब पैर – ओड़कर सासर पहुंची I ससुरो, सासु न कयो कि बहू भोत बड़े घर की है, भोत धन लेकर आई है I और कहो कि पड़ोसन क स मूंग भात ल्या कर बहू खातर बनाओ I बहू बोली कि मेरा कलसा क जल स बनायो I ल्याकर चढ़ाया तो टोप भरगा I तरह – तरह की मिठाइयाँ होगी I सासु बोली कि बहू जीम ले I जद बहू बोली कि ससुरोजी कोनी जिम्या, थे कोनी जिम्या, ये कोनी जिम्या, पहले म कैयां जीम लूँ और मेर सत्य भगवान की कहानी को भी नेम है I पिछ बहू कहानी कही, सब कोई सुन्या I उनां क घर म धन का ढेर होगा I सासु संग ल सत्य भगवान को प्रसाद बांटती फिर I पड़ोसन बोली कि अभी तो मूंग – भात उधार लेगी थी, इतनी देर म इतनो धन कठ स ल्याई I जद बोली कि मेरी बहू सत्य भगवान की कहानी कया कर है, सो ब ही दियो है I हे सत्य भगवान ! जिसो साहूकार की बहू न दियो जिसो सब न परिवार न देईयो I कहता न, सुणतां न, अपना सब परिवार न देईयो I