
श्यामजी की जात
Date: 15 March 2022
फागुन सुदी बारस को ” श्यामजी की जात ” लगती है । एक जगह थोड़ी सी मिट्टी बिछा कर, उसके ऊपर थोड़ा सा चावल रखकर एक घी का दीया जलाओ । दीया के आगे अग्नि रखकर घी से ज्योति जलाओ । फिर चूरमा, रोली, चावल, फूल, नारियल, चढ़ा कर धोक दे दो । ब्राह्मण को जिमाओ । चिटकी (सूखे नारियल के टुकड़े) – चूरमा का प्रसाद खाओ । प्रसाद को रात बासी नहीं रखते ।
श्यामजी का भजन
श्याम सुहावणा बाबा श्याम, धन साधु धन सांवरो बाबा श्यामजी,
प्रभु धन र ढूँढड़ो लोग । श्याम…..
कुणार चिणायो थारो देवरो बाबा श्यामजी, प्रभु सेवकां लगाई गज नीम । श्याम…..
राजाजी चिणायो म्हारो देवरो बाबा श्यामजी, प्रभु सेवकां लगाई गज नीम । श्याम…..
अस्सी कोसा म थारो देवरो बाबा श्यामजी, प्रभु सारी सृष्टि म जगा जोत । श्याम…..
सूरज स्यामी थारो देवरो बाबा श्यामजी,प्रभु धजा ए फरूक असराल । श्याम…..
कैंकी तो गाड़ी हंकी बाबा श्यामजी, प्रभु संग कुण्या जीरो जाय । श्याम…..
दशरथ जी की गाड़ी हांकी बाबा श्यामजी,प्रभु संग रामचन्द्रजी को जाय । श्याम…..
जीतो आव थार दूर का बाबा श्यामजी, प्रभु सांवलिया मोटियार । श्याम…..
जात अब कुल बहु बाबा श्यामजी, प्रभु गोद जद जडू ल पूत । श्याम…..
गाडो तो भरल्यो चुन को बाबा श्यामजी, प्रभु सगलो कबीलो लेल्यो साथ । श्याम…..
दड़ को तो कर ल्यो चूरमो बाबा श्यामजी, प्रभु घी की तो रेला ठेल । श्याम…..
चढ़ए चड़ाव थार चूरमो बाबा श्यामजी, प्रभु और चुटाल्यो नारेल । श्याम…..
खल हल नल हल नदी एव बाबा श्यामजी, प्रभु यो पानी कित जाय । श्याम…..
आदो तो आसी मेड़त बाबा श्यामजी, प्रभु आदो खाटूक देस । श्याम…..
दरसण परसण म्हे किया बाबा श्यामजी, प्रभु द्योर हुकम घर जाय । श्याम…..
फल जो तो कुल जो नीम जूं बाबा श्यामजी, सेवको थारी बढ़ा जो बेल । श्याम…..
जो थारी निन्दा कर बाबा श्यामजी, प्रभु थान थें पटक पहाड़ । श्याम…..
कोई थारी पूजा कर बाबा श्यामजी, प्रभु जांको थे रली ए पनोय । श्याम…..
जो प्रभु जांका थे कारज सार, श्याम सुहावणा बाबा श्याम ।