देव उठनी ग्यारस

Date: 04 November 2022

कार्तिक सुदी ग्यारस को ” देव उठनी ग्यारस ” आती है। इस दिन जमीन पर चून और गेरू से देव मांड कर, एक कठुवा रख दो । शाम को देव की जल, रोली, मोली, चावल, फूल, गुड़, ऊख, चार सुहाली, चार केला, सवा सेर चावल, गूंवार की फली, मूली, रूई, दक्षिणा चढ़ा कर पूजा करो । दीया जलाओ । देव उठाने का तीन गीत और चार बधावा गाओ । गीत में भगवान के बदले अपना नाम लो ।

                                                                                                               देव उठाने का गी

(Jukebox For All Geet Written Below)

1) उठो देवो बैठो देवो

 उठो देवो बैठो देवो, सोटकड़ी सटकाओ देवो, 
आल धरिया पांच पचेटा, ये बहू रुकमण थारा बेटा, 
आल धरिया हर्षाय झमीर, ये बहू यशोधरा थारा वीर, 
जितनी खूटियां टांगुनी सूत, जितना अंबर जगमा पूत, 
जितनी अबरी सोक मलाई, जितना अटर भंवर आई, 
जितनी अंधर सींक सलाई, जितनी अंधर भैंवड़ आई, 
जितनी अंधर ठिकरियां, जितनी अंधर डिकरियां, 
जितना अंधर ईटा रोड़ा, जितना अंधर हाथी घोड़ा, 

2) तू तो उड़र म्हार

तू तो उड़र म्हारा हरिये बनका सुबटा जी । उठ बैठ चम्पा की डाल ।
देवोना दशरथजी रामचन्द्रजी अवतार जी । जै की आज कर सब कोई ।
रावल जाता म्हारा राजा डान जुगनव जी । थे तो पैरो ना म्हारी बहू ए सीता दे चुजलो जी ।
थारी-चुड़ला री शोभा भोत । चुड़लो चितरंगोजी मोहर पचास को जी ।

3) म्हार आंगणा जी पन्न

म्हार आंगणा जी पन्ना मारू मेहँदी को रुख, सेला मारू मेहँदी को रुख,

जांकी तो गुदली जी गुदली छांवणी जी ।

जै बल सुत्याजी साजी दशरथजी रा पूत, कंवर रामचन्द्रजी राजपूत,

ऊपर तान्यो जो प्रेम पछेवड़ो जी । 

जाय जागावो जीबाई सुभद्रा थरण बीर, बाई सुभद्रा था खडा बीर,

म्हारो जगावो हजारी ढेला न जाग जी ।
उठ्या जी पन्ना मारू अंग मरोड़, सेला मारू अंग मरोड़,

जाणे कोई कलम सूरज उगयो जी ।
थारी बोली जी पन्ना मारू हदक सरूप, सेला मारू हदक सरूप,

जाणे अम्ल्यां री डाल्या बोल सुवटो जी ।
थारी चलगत जी पन्ना मारू हदक सरूप, मेला मारू हदक सरूप,

जाणे मगनो सो हस्ती आव झूमतो जी ।