
गनगोर
Date: 19 Mar 2022 – 4 Apr 2022
होली के दूसरे दिन से चैत सुदी तीज तक कुँवारी और ब्यावली साल की लडकियां ” गनगोर ” पूजती हैं I इस दिन सुबह आठ पीन्डिया होली की राख का और आठ पीन्डिया गोबर का बना के, छोटी टोकरी में दूब बिछा कर रखा जाता है I लडकियां सुबह बाहर से एक लोटा में जल, दूब, फूल लेकर “दुबल्या का गीत” गाती हुई आती है I
इसके बाद जमीन पर गोबर माटी का चोका देकर पीन्डिया की टोकरी रखो I दीवाल या गत्ता पर एक काजल की और एक रोली की टिक्की दो I पीन्डिया पर जल का छींटा दो I गोबर के पीन्डिया पर रोली की और राख के पीन्डिया पर काजल की टिक्की दो I फूल चढ़ाओ I “सबेर का गीत” गाओ I एक छन्नी में थोड़ा सा जल, एक कौड़ी, एक सुपारी, एक छल्ला और एक पैसा रख कर दूब से सोलह छांटा दो I “एल-खैल” का गीत गाते हुए जल की छन्नी उलट दो I कौड़ी – छल्ला वगैरह पीन्डिया के लगा कर अपने आँख में लगा लो I फिर पीन्डिया को लेकर खड़े हो जाओ I बासेड़ा तक ऐसे ही पूजा करो I बासेड़ा के दिन गनगोर लाओ या फिर बनाओ I एक कुंडा में गनगोर या गनगोर की माटी के लिए और एक झुंवारा ऊगाने की खातिर कुंडा कुम्हार के यहाँ से “माटी ल्यान का गीत” गाते हुए लाओ I गनगोर को सजाकर कुंडा में दूब बिछा कर रखो I दूसरे कुंडा में झुंवारा (माटी में गेहूं डालकर) उगाओ I दिन में बाहर से “पानी प्यान का गीत” गाते हुए पानी लाओ I गनगोर को प्रसाद लगाकर पानी पिलाओ I शाम को “धुप का गीत” गाते हुए धुप करो I “रात का गीत” गाओ I दूसरे दिन सुबह पीन्डिया और गनगोर की पूजा करो I पीन्डिया की रोज की तरह ही पूजा करो I गनगोर को दूब का दातन कराओ, जल चढ़ाओ, टीका लगाओ, काजल लगाओ, फूल-माला चढ़ाओ I फिर “सबेर का गीत” के साथ “झुंवारा” का भी गीत गाओ I छन्नी के जल से पहले तो “आरती” करो, फिर छांटा घाल कर “एल-खैल” का गीत गाते हुए छन्नी उलट दो I उस जल से ओढ़ना में मोती पाड़ो (दूब को जल में डूबोकर अपने ओढ़ना पे बूंदे गिराओ) I “गनगोर की कहानी” पढ़ो I फिर मोती सारे गनगोर पर चढ़ा दो I “सीठना” गाते हुए गनगोर – पीन्डिया को लेकर खड़े हो जाओ I दूज तक ऐसे ही पूजा करो I बीच में कोई भी रविवार को “सूरज रोटा” का व्रत करो और गनगोर आने के बाद अच्छा दिन देखकर “गोरबिन्दोरा” करो I तीज को घर की सारी औरतें भी गनगोर की पूजा करते हैं I अगर घर में लड़कियाँ पूज रही हैं तो उनके साथ नहीं तो बाहर से मंगा कर पूजा करो I जमीन पर गोबर – माटी का चोका देकर, दूब – झुंवारा बिछाकर, गनगोर को कुंडा में से निकालकर बैठा दो I सीरा से जिमाओ I दक्षिणा चढ़ाओ I गेहूं की कुड्डी पर दिया जलाओ I धुप करो I दिवाल पर या गत्ता पर सोलह मेहँदी, सोलह काजल, और सोलह रोली की टिक्कियां दो I फिर गीत गाओ I आरती करने के बाद दूब – झुंवारा मिलाकर सोलह – सोलह छींटा दो I फिर “सीठना” के बाद “बधावा” और गाओ I सीरा – पूड़ी पर बाना निकालकर सासुजी को पैर छूकर दे दो I बहन -बेटियाँ का भी बाना निकालकर सीरा – रुपिया भेजो I दिन में गनगोर को पानी पिलाकर विदा करो I “विदा का गीत” गाते हुए गनगोर और दायजा ( रोज की पूजा की हुई और बची हुई दूब ) गंगाजी, नदी या कूंवा में विसर्जन कर दो I फिर “बधावा” गाते हुए वापस आ जाओ I
विवाह के बाद गनगोर का उजमन (पीहर)
लड़की तीज के दिन गनगोर पूजा करती है I तब आठ मीठी और आठ फीकी माठी गनगोर को चढ़ाती है I सोलह जगह आठ – आठ मीठी – फीकी माठी पर कपड़ा और रुपिया रख कर, हाथ फेर कर सासुजी को पैर छूकर देती हैं I आठ मीठी और आठ फीकी सुहाली जंवाई के लिए भी भेजते हैं I आठ मीठी और फीकी माठी लड़की खाती है I आठ मीठी और आठ फीकी माठी भाई के लिए बनाते हैं जिसमे स पहले भाई को खिला कर, सब कोई खा लेते हैं I
गनगोर का उजमन (ससुराल)
बहू कभी भी गनगोर का उजमन करती है I तीज के दिन गनगोर की पूजा कर के जब बाना निकालो, तब एक थाली में सोलह जगह चार – चार पूड़ी और सीरा और सुहाग पिटारी सासुजी की और सोलह ब्राह्मणियों की बनाओ I सासुजी के सामान में रुपिया, कपड़ा और नथ भी रहेगा I फिर सासुजी को पैर छूकर दे दो I फिर सोलह ब्राह्मणियों को भोजन खिलाओं और बाना निकाला हुआ सीरा – पूड़ी भी परोसो I भोजन कराने के बाद सभी के टीका काढ़ कर सोलह सुहाग पिटारी जिनमे हाथ फेरा हुआ है दे दो I दक्षिणा भी दो I
हर एक सुहाग पिटारी की सामग्री
मेहँदी, रोली, काजल, मैण, हींगलू, दर्पण, कंघा, चूड़ा, नाल, रुपिया, नथ, पोली, पायल, साड़ी ब्लाउज I