
गोबरधन
Date: 26 October 2022
कार्तिक में दिवाली के दूसरे दिन सुबह ” गोबरधन ” की पूजा करते हैं । इस दिन गोबरधन बना कर, जल, दही, मोली, रोली, चावल, फूल, तेल में भिगोकर रूई, मूंग की दाल, चार बताशा, चार गुड़ की सुहाली, सफेद कपड़ा और दक्षिणा चढ़ा दो । गोबरधन के सिर पर झेरना रखो । एक गोबरधन का गीत (नीचे लिखा है) और चार बधावा गाओ । फेरी दो । फिर पूजा का चढ़ावा ब्राह्मणी को दे दो । झेरना वापस रख लो ।
गोबरधन गीत
नन्द महर घर सुरही सी गाय , कजंली बन चरबा गई ओ राम ।
एक बन चरति सकल बन चर , कजली बन सारो चर्यो ओ राम ।
चरती-चरती माता होई ए तिसाई , नारियो क धरा ए बधावणा ओ राम ।
तन ए गावतरी माता जाण न द्यो , कजली बन सारो चर्यो ओ राम ।
एक बर तो नार बीरा घर न जाऊं , घरां ए उड़ी क बालक बाछड़ा ओ राम ।
झूठी ए गवतरी माता झूठ न बोल , घरां ए गई क्यूँ बावड़ ओ राम ।
हम न पतीज म्हार राम न पतीज , बचनारी बाँधी सुरही नार व् ओ राम ।
आई ए गवतरी माता बैठी आप क ठाव , ढलक ढलक आंसु पड़ ओ राम ।
आवो रे मेरा बालक बाछा पीवो मेरो दूद , बचनारी बाँधी सुरहीना रव ओ राम ।
चालो ए गवतरी माता चाल थार साथ , बचनारो बांधो दुदो ना पिवा ओ राम ।
आग आग , बालक बाछा पिछ सुरही गाय , नारिये क घरां ए बधावणा ओ राम ।
पहली तो मेरा नार माता हम न बिणास , पिछ ए बिणासी मेरी माय न ओ राम ।
कुण र मेरा बालक बाछा दीनी थाने सीख , कुण गुरु समझाया ओ राम ।
अलख निरंजन बाबो दिन्ही म्हा न सीख , प्रेम गुरु समझाया ओ राम ।
त न रे म्हारा बालक बाछा झबला टोपी द्यां , पीलो ए उढ़ावां थारी माँ न ओ राम ।
जीवो रे मेरा बालक बाछा लाख बरसुत , म्हारे मान बढ़ाइया ओ राम ।