होली

Date: 18 March 2022

होली का बड़कुल्ला

               फागुन सुदी में होली के दस दिन पहले अच्छा दिन देखकर सात गोबर का बड़कुल्ला बनाते हैं । ग्यारस के पहले और भी बड़कुल्ला बनाते हैं, जिसमें नारियल, पान, प्यावड़ी, जीभ, पाटा, पीढ़ा, खिलौना और बड़कुल्ला बनाते हैं । ग्यारस के दिन पांच ढाल, एक तलवार, एक चाँद, एक सूरज, एक नारियल, एक जीभ, एक पूरी रोटी, एक आधी रोटी, एक पान, एक होलिका माई और एक होलिका बनाते हैं । रोली, मेहँदी, हल्दी और आटा से चीत लो (टिक्की देकर सजा दो) । अगर किसी की लड़की या लड़के की शादी का उजमन हो, तो तेरह सुपारी और बनाओ । होलिका माई बनाने के बाद बड़कुल्ला नहीं बनाओ ।

ढूंड का नेग

फागुन सुदी ग्यारस को, जिस साल लड़का होता है उस साल लड़के की नानी ” ढूँढ का नेग ” भेजती है । नेग में एक पीला, एक कब्जा (ब्लाउज पीेस), लड़के का कपड़ा, एक सफेद कपड़ा के साथ, सवा सेर सिंघाड़ा, सवा सेर बतासा और रुपिया भेजती है । लड़के की माँ कब्जा – ओढ़ना पहन कर, लड़के को सफेद कपड़ा पहना कर, गोदी में लेकर, बतासा-सिंघाड़ा की तेरह कुड्डी और रुपिया को रोली-चावल से चिरच कर हाथ फेर कर, सासुजी को पैर छूकर देती दो ।

होली

फागुन की पूर्णिमा को ” होली ” होती है । इसे रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है I इस दिन सुबह हनुमानजी और पित्तरजी के धोक लो । जल, रोली, मोली, फूल, प्रसाद, नारियल, गुलाल और दक्षिणा चढ़ाओ । धुप-दीप करो । अगर किसी के घर में भैरूजी की पूजा होती है तो घर के सभी बच्चों से पैसा हाथ लगवा कर, उस पैसे से तेल खरीद कर भैरूजी के मंदिर में चढ़ाते हैं I शाम को रसोई में दाल का सीरा, पूड़ी, बड़ा, साग, फली, कैरिया, तला हुआ पापड़ बनाओ । इसके अलावा आपका जो मन हो वो बनाओ । भगवान के भोग लगाओ I फिर सब तरह की रसोई को एक थाली में लगाकर मन में देवी-देवता का नाम लेकर हाथ जोड़ लो । ये ब्राहमणी को दे दो । ब्राह्मण को भी जिमाओ । जब भद्रा नही हो, तब नारियल की रस्सी में बड़कुल्ला की माला पो । एक बड़कुल्ला की माला तो आदमी के जितनी बड़ी बनती है, बीच में होलिका माई, बगल में ढाल-तलवार, फिर सब तरह का खिलौना पोया जाता है । दूसरी बड़कुल्ला की माला उससे छोटी बनती है । एक हनुमानजी, एक पित्तरजी , एक शीतलामाई, एक घर की और आपके घर में जितने आदमी-लड़के होते हैं उतनी माला और बनती है । हर एक माला में एक पान, एक प्यावड़ी, नारियल, एक जीभ और सात बड़कुल्ला पोते हैं । होलिका दहन से पहले बड़कुल्ला की पूजा करते हैं । जमीन पर गोबर-जल का चोका देकर, चार ईख (गन्ना) बीच में रख कर, बड़कुल्ला की माला से सजा देते हैं । फिर उनकी पूजा करते हैं । जल, मोली, रोली, चावल, फूल, गुलाल, गुड़ और दक्षिणा चढ़ाते हैं । धुप-दीप करते हैं । चार फेरी देते हैं । पूजा करने के बाद हनुमानजी, पित्तरजी, शीतलामाई और घर की माला तो रख लेते हैं, बाकी होलिका दहन में ले जाते हैं I साथ में पूजा की थाली, कच्चे सूत की रील, एक नारियल, पापड़, जल का लोटा और एक ईख, हरा चना, जौ-नीम की डाली बाँध कर ले जाते हैं । वहां जाकर सारी बड़कुल्ला की माला होलिका में चढ़ा देते हैं । होलिका की पूजा करते हैं, पापड़ सेकते हैं, जल गरम करते हैं, चना-जौ को सेक लेते हैं, नारियल पधारते हैं । कच्चे सूत की रील, 2 हल्दी की गाँठ को झल दिखा कर ( होलिका की अग्नि की लौ में दिखाकर ), बीच की ऊख, तलवार, होली की राख और सब चीजों को लेकर वापस घर आ जाओ । झल दिखाई हुई कच्चे सूत की रील से चैत में सांपदा माता का डोरा लेते हैं और झल दिखाई हुई हल्दी की गाँठ को पीस कर उसे चैत में बासेड़ा के दिन कुंडारे में लगाते हैं और शीतला माता को चढ़ाते हैं I होलिका की आग से सब कमरे में धुप करते हैं । जब आदमी होलिका दहन की पूजा करने चले जाते हैं, तब औरतें पीछे से होली की झल को कच्चा सूत और हल्दी की गाँठ दिखाती हैं और उसे जल चढ़ा कर रोली,चावल से चिरचती हैं । होली के गीत गाया जाता है । गीत में भगवान के नाम के बदले घर ले लोगों का नाम लेते । पूजा कर के सासुजी को पैर छूकर रुपिया देते हैं । नारियल के टुकड़े और जौ-चना का प्रसाद लेते हैं I

होली का फेरा

लड़की ब्याह्वली साल होली जलने के बाद विवाह की पोटली ( शादी में सिरगुत्थी के समय जो पोटली डाली जाती है ) लेकर,ओढ़ना ओढ़कर, नथ पहन कर पूजा करती है और  चार फेरा लेती है ।

होली का उजमन

जब बेटा होता है या बेटे का विवाह होता है, उस साल उजमन करते हैं । तेरह जगह चार-चार पूड़ी-सीरा, साड़ी, रुपिया और तेरह गोबर की सुपारी नाल में पोकर, हाथ फेरकर सासुजी को पैर छूकर देते हैं । सुपारी घर  टांग लेते हैं ।